किसानों के लिए गेम-चेंजर बनी रीपर मशीन, अब कम समय में होगी तेज और सस्ती कटाई

आज बाजार में रीपर मशीन के अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं. कुछ मशीनें खुद चलने वाली होती हैं, जबकि कुछ ट्रैक्टर से जोड़कर चलाई जाती हैं. ट्रैक्टर चलित रीपर मशीन किसानों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि यह मजबूत होती है और बड़े क्षेत्र में आसानी से काम कर लेती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 7 Feb, 2026 | 09:11 AM

Reaper machine: भारत में खेती अब धीरे-धीरे आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है. बदलते समय के साथ किसानों को यह समझ में आने लगा है कि परंपरागत तरीकों से खेती करने पर मेहनत तो ज्यादा लगती है, लेकिन मुनाफा उतना नहीं मिल पाता. खासकर फसल कटाई के समय मजदूरों की कमी, बढ़ती मजदूरी और समय पर कटाई न हो पाने की परेशानी हर किसान ने कभी न कभी झेली है. ऐसे में रीपर मशीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है. यह मशीन न केवल फसल कटाई को आसान बनाती है, बल्कि समय, लागत और मेहनत तीनों की बचत करती है. सरकार भी किसानों को इस मशीन को अपनाने के लिए सब्सिडी दे रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए इसे खरीदना आसान हो गया है.

क्या है रीपर मशीन और कैसे बदल रही है खेती की तस्वीर

रीपर मशीन एक आधुनिक कृषि यंत्र है, जिसे खासतौर पर फसलों की कटाई के लिए तैयार किया गया है. पहले जहां एक एकड़ खेत की कटाई में कई मजदूर और पूरा दिन लग जाता था, वहीं अब यह मशीन कुछ ही समय में यह काम कर देती है. यह मशीन फसल को जड़ के पास से काटती है और उसे एक तरफ सलीके से गिरा देती है, जिससे आगे की प्रक्रिया आसान हो जाती है. खेत साफ रहता है और पराली या डंठल की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाती है.

आज बाजार में रीपर मशीन के अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं. कुछ मशीनें खुद चलने वाली होती हैं, जबकि कुछ ट्रैक्टर से जोड़कर चलाई जाती हैं. ट्रैक्टर चलित रीपर मशीन किसानों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि यह मजबूत होती है और बड़े क्षेत्र में आसानी से काम कर लेती है.

कम समय में ज्यादा काम, मजदूरी की टेंशन खत्म

रीपर मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में फसल की कटाई कर सकती है. सामान्य तौर पर यह मशीन 45 से 60 मिनट में लगभग एक एकड़ खेत की फसल काट देती है. इसे चलाने के लिए बहुत ज्यादा ताकतवर ट्रैक्टर की भी जरूरत नहीं होती. मध्यम क्षमता वाला ट्रैक्टर इस मशीन को आसानी से चला सकता है.

इस मशीन के इस्तेमाल से किसानों को मजदूरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. कटाई के मौसम में जब मजदूर नहीं मिलते या मजदूरी बहुत ज्यादा हो जाती है, तब रीपर मशीन किसानों के लिए बड़ी राहत बन जाती है.

किन फसलों में है ज्यादा उपयोगी

रीपर मशीन का उपयोग कई तरह की फसलों की कटाई में किया जा सकता है. धान और गेहूं जैसी मुख्य फसलों के अलावा मूंग, उड़द और चना जैसी दलहनी फसलों में भी यह मशीन काफी कारगर साबित हो रही है. फसल की कटाई एक समान होने से दाने भी सुरक्षित रहते हैं और नुकसान कम होता है. समय पर कटाई होने से किसान अगली फसल की तैयारी भी जल्दी कर पाते हैं, जिससे साल भर की खेती की योजना बेहतर बनती है.

कमाई का अतिरिक्त साधन भी

रीपर मशीन सिर्फ अपनी फसल काटने तक ही सीमित नहीं है. कई किसान इसे खरीदकर आसपास के दूसरे किसानों के खेतों में किराए पर भी चलाते हैं. इससे उन्हें अच्छी अतिरिक्त आय हो जाती है. कटाई का किराया प्रति घंटे के हिसाब से लिया जाता है, जिससे कुछ ही सीजन में मशीन की लागत निकलने लगती है. इसके अलावा, साफ-सुथरी कटाई से भूसा भी अच्छी मात्रा में मिलता है, जिसे बेचकर या पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

कीमत और सरकारी सब्सिडी से मिली राहत

रीपर मशीन की कीमत उसके मॉडल, क्षमता और सुविधाओं पर निर्भर करती है. आमतौर पर इसकी कीमत पचास हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक हो सकती है. किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कृषि यंत्र अनुदान योजनाओं के तहत इस मशीन पर सब्सिडी का प्रावधान किया है. सामान्य वर्ग के किसानों को लागत का एक बड़ा हिस्सा अनुदान के रूप में मिलता है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु और सीमांत किसानों तथा महिला किसानों को और ज्यादा सब्सिडी दी जाती है.

कुछ राज्यों में यह अनुदान राशि काफी अधिक है, जिससे किसानों पर मशीन खरीदने का बोझ बहुत कम हो जाता है. सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करना होता है और तय प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

केला जल्दी काला क्यों पड़ जाता है?