Dairy Farming Tips : पशुपालन में सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब बेजुबान जानवर अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता पाते. अक्सर हम देखते हैं कि पशु चारा खाना छोड़ देते हैं, बेचैन रहते हैं और रात भर पैर पटकते रहते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण गौशाला में पनपने वाले मक्खी और मच्छर हैं. ये न केवल पशुओं का खून चूसते हैं, बल्कि उन्हें लम्पी जैसे खतरनाक चर्म रोगों का शिकार भी बना देते हैं. जब पशु शांत नहीं रहेगा, तो उसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है.
पशुपालकों के लिए एक ऐसा घरेलू और असरदार नुस्खा सामने आया है जो महंगे कीटनाशकों से कहीं ज्यादा बेहतर और सुरक्षित है. यह नुस्खा न केवल मक्खी-मच्छरों को भगाता है, बल्कि आपके पशुओं को बीमारियों से भी दूर रखता है. आइए जानते हैं इसे बनाने और इस्तेमाल करने का आसान तरीका.
दूध कम होने का क्या है असली वजह?
अक्सर किसान परेशान रहते हैं कि अच्छी खुराक देने के बाद भी उनकी गाय या भैंस दूध कम दे रही है. दरअसल, जब मक्खी और मच्छर पशु को लगातार काटते हैं, तो वह तनाव (Stress) में आ जाता है. वह ठीक से जुगाली नहीं कर पाता और चारे को पचाने के बजाय अपनी ऊर्जा इन मच्छरों को भगाने में लगा देता है. इससे पशु धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और उसे त्वचा से जुड़ी बीमारियां घेर लेती हैं. यही वजह है कि पशु को बाहरी परजीवियों से बचाना बहुत जरूरी है.
घर पर ऐसे तैयार करें स्प्रे
बाजार में मिलने वाले स्प्रे कई बार पशुओं की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन नीम और कपूर का मेल पूरी तरह प्राकृतिक है. इसे बनाने के लिए आपको चाहिए:-
- 1 लीटर नीम का तेल
- 100 ग्राम कपूर (Camphor)
बनाने की विधि- सबसे पहले कपूर को बारीक पीस लें. अब इसे 1 लीटर नीम के तेल में अच्छी तरह मिला दें. जब कपूर तेल में पूरी तरह घुल जाए, तो इसे एक स्प्रे बोतल में भर लें. यह आपका ताकतवर और खुशबूदार एंटी-मच्छर स्प्रे तैयार है.
शरीर के साथ कोने भी होंगे साफ
इस तेल का इस्तेमाल करना बहुत आसान है. शाम के समय, जब मच्छरों का हमला तेज होता है, तब पशु के शरीर पर हल्की मात्रा में इसे स्प्रे करें या सूती कपड़े की मदद से लगा दें. ध्यान रखें कि पशु की आंखों और मुंह के पास इसका इस्तेमाल न करें. इसके अलावा, गौशाला के कोनों, दीवारों और नालियों के पास भी इसका छिड़काव करें. इसकी तेज महक से मक्खियां और मच्छर तुरंत भाग जाते हैं और दोबारा पास नहीं फटकते.
बीमारी से सुरक्षा और बढ़ता मुनाफा
नीम में प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया और कीटाणुओं को मारने की शक्ति होती है. जब आप इस मिश्रण का इस्तेमाल करते हैं, तो पशु को लम्पी जैसे चर्म रोग (Skin Diseases) होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है. पशु शांत होकर आराम करता है और अच्छे से जुगाली करता है. जब पशु खुश और शांत रहता है, तो उसका दूध उत्पादन अपने आप ही बढ़ जाता है. इस छोटे से बदलाव से आप डॉक्टरों के भारी खर्च से बच सकते हैं और अपने डेयरी बिजनेस को मुनाफे में ला सकते हैं.