Giloy Benefits For Cows : सर्दियों का मौसम आते ही जैसे इंसानों की इम्यूनिटी कमजोर पड़ती है, वैसे ही गाय-भैंस भी जल्दी बीमार होने लगती हैं. कभी बुखार, कभी खांसी, तो कभी पाचन की दिक्कत-इन सबका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. ऐसे में अगर बिना महंगी दवाइयों के, घर बैठे कोई देसी उपाय मिल जाए, तो पशुपालकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं. आयुर्वेद में सदियों से इस्तेमाल हो रही गिलोय आज फिर से गायों की सेहत सुधारने का भरोसेमंद सहारा बन रही है.
गिलोय क्यों है गायों के लिए खास औषधि
गिलोय को आयुर्वेद में अमृता कहा गया है, यानी अमरता देने वाली औषधि. यह एक बेलनुमा लता होती है, जो नीम और जामुन जैसे पेड़ों पर चढ़ी दिखाई देती है. गिलोय का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की अंदरूनी ताकत बढ़ाती है. बदलते मौसम, गंदे पानी या कमजोर चारे की वजह से जब गाय जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगती हैं, तब गिलोय उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है. इससे गाय वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से खुद लड़ने लगती है.
बुखार और पाचन की परेशानी में देसी इलाज
सर्दी और बरसात के मौसम में गायों को बुखार होना आम बात है. कई बार दवाइयों के बाद भी बुखार बार-बार लौट आता है. गिलोय में प्राकृतिक ज्वरनाशक गुण होते हैं, जो धीरे-धीरे बुखार को कम करते हैं. इसके साथ ही यह शरीर में जमा गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है. इतना ही नहीं, जिन गायों को गैस, अपच, भूख न लगना या दस्त की शिकायत रहती है, उनके लिए भी गिलोय फायदेमंद मानी जाती है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है, जिससे खाना सही तरीके से पचता है और शरीर को पूरा पोषण मिलता है.
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दूध उत्पादन और जोड़ों की समस्या में भी असरदार
गिलोय का असर सीधे दूध पर नहीं, बल्कि गाय की सेहत पर पड़ता है. जब गाय अंदर से स्वस्थ रहती है, पाचन सही होता है और शरीर में सूजन नहीं होती, तो दूध अपने आप बढ़ने लगता है. कई पशुपालकों का अनुभव है कि गिलोय के सीमित उपयोग से दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार आता है. इसके अलावा, अधिक दूध देने वाली या उम्रदराज गायों में जोड़ों का दर्द और सूजन आम समस्या है. गिलोय में मौजूद सूजनरोधी गुण इस दर्द को कम करने में मदद करते हैं, जिससे गाय ज्यादा सक्रिय रहती है.
गिलोय देने का सही तरीका और सावधानी
गायों को गिलोय देने का सबसे अच्छा तरीका है इसका काढ़ा बनाना. ताजी गिलोय की डंडी को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो ठंडा कर छान लें. इस काढ़े को पशु चिकित्सक की सलाह से सीमित मात्रा में दें. ध्यान रखें कि किसी भी औषधि की अधिक मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है. सही मात्रा और नियमित देखभाल से गिलोय गायों के लिए सर्दियों में देसी संजीवनी साबित हो सकती है.