Dairy Farming: गर्भवती गाय-भैंस हमेशा रहेंगी फिट, बस पशुपालक जान लें ये खास बातें… दूध की बहेगी धारा!

Dairy Farming: गर्भवती दुधारू पशुओं की सही देखभाल बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इसी समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है. समय पर कैल्शियम देना, संतुलित आहार, सही तरीके से दूध निकालना और आरामदायक देखभाल से पशु स्वस्थ रहता है, मिल्क फीवर का खतरा कम होता है और दूध उत्पादन भी बना रहता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 22 Jan, 2026 | 02:19 PM

Dairy Farming Tips: हमारे यहां खेती-बाड़ी की परंपरा तो सदियों से चली आ रही है और आज भी ज्यादातर ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी का बड़ा हिस्सा खेती पर ही टिका है. खेती के साथ-साथ पशुपालन भी हमेशा से हमारे गांव का हिस्सा रहा है. पहले तो लोग बैल से हल चलाते थे और घर के दूसरे कामों में भी उनका इस्तेमाल होता था. लेकिन अब ये सिर्फ मदद वाला काम नहीं रहा, बल्कि कई किसानों के लिए ये पैसे कमाने का बड़ा जरिया बन गया है. खासकर दुधारू पशु पालना अब बहुत लोग कर रहे हैं, क्योंकि इससे घर में दूध भी मिलता है और डेयरी के प्रोडक्ट्स बेचकर अच्छी कमाई भी हो जाती है.

हालांकि, दुधारू पशु का पालन आसान दिखने के बाद भी कई बार चुनौतियों भरा भी हो सकता है. कई पशुपालक इस बात से अनजान होते हैं कि गर्भधारण के समय पशु का सही प्रबंधन कैसे करें, जिससे बीमारियों या नुकसान से बचा जा सके. अगर समय पर उचित देखभाल और खान-पान का ध्यान न रखा जाए तो पशु बीमार पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कैल्शियम की कमी से बढ़ सकता है खतरा

जमीन पर काम करने वाले अधिकांश पशुपालक इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि गर्भधारण के समय पशुओं को कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा मिलना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट के अनुसार गर्भधारण के समय पशुओं का खान-पान और देखभाल विशेष ध्यान देने योग्य होती है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती पशुओं के लिए साफ-सुथरा निवास, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी बेहद जरूरी है. खासकर ठंड के मौसम में पानी सामान्य तापमान पर देना चाहिए. इसके साथ ही 15 दिन पहले से ही कैल्शियम सप्लीमेंट देना शुरू कर देना चाहिए, ताकि पशु की हड्डियों और दूध उत्पादन में कोई कमी न आए.

दूध निकालने का सही तरीका

गर्भधारण के तुरंत बाद दूध निकालते समय भी सावधानी बरतनी जरूरी है. अगर ध्यान न दिया जाए तो पशु को मिल्क फीवर जैसी बीमारी हो सकती है, जिससे पशु खड़ा भी नहीं हो पाता. इस समय सही तकनीक और संतुलित कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ दूध निकालना चाहिए. इससे न केवल पशु स्वस्थ रहता है बल्कि दूध की मात्रा भी बनाए रहती है और किसान को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होता.

पशुपालक के लिए टिप्स

  • गर्भधारण के 15 दिन पहले से कैल्शियम सप्लीमेंट देना शुरू करें.
  • ठंड में पानी का तापमान सामान्य रखें, ज्यादा ठंडा पानी न दें.
  • गर्भवती पशु के निवास को साफ और सुरक्षित रखें.
  • दूध निकालते समय हल्के हाथ और सही तकनीक का इस्तेमाल करें.
  • पोषण संतुलित हो और हरी घास, जौ, चारा पर्याप्त मात्रा में मिले.
  • किसी भी बीमारी या कमजोरी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाएं.

दुधारू पशु पालन लाभदायक होने के साथ-साथ थोड़ा सावधानी भी मांगता है. खासकर गर्भधारण के समय छोटे-छोटे नियमों का पालन करके किसान अपने पशु को बीमारियों से बचा सकते हैं और दूध उत्पादन भी बढ़ा सकते हैं. समय पर कैल्शियम सप्लीमेंट, सही खान-पान और सावधानीपूर्वक दूध निकालना ही सुरक्षित और लाभकारी पालन का राज है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

सर्दियों में गुड़ का सेवन क्यों अधिक किया जाता है?