फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है ये दवा, किसान खेती में करें इसका इस्तेमाल

इफको की पोटेशियम सल्फेट में 50 फीसदी पोटेशियम और 17.5 फीसदी सल्फर की मात्रा होती है. यह पानी में आसानी से घुलने वाला उर्वरक है. जिसका इस्तेमाल कर किसान पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 18 May, 2025 | 06:05 PM

किसी भी फसल की बुवाई के बाद ये जरूरी है कि किसान अपनी फसल को रोग प्रतिरोधी बनाए. यानी किसान फसलों में रोग लगने से पहले ही उन्हें सुरक्षित कर दें ताकि रोगों या कीटों के आक्रमण से फसल खराब न हो और किसानों को भी नुकसान न हो. लेकिन कई बार सही उर्वरक या कीटनाशक ने मिल पाने के कारण फसलों पर रोग या कीट लग जाने की वजह से फसलें खराब हो जाती हैं. ऐसा होने पर किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है. फसलों में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए किसान इफको की दवा पोटेशियम सल्फेट का इस्तेमाल कर सकते हैं.

कैसे काम करता है पोटेशियम सल्फेट

इफको की पोटेशियम सल्फेट में 50 फीसदी पोटेशियम और 17.5 फीसदी सल्फर की मात्रा होती है. यह पानी में आसानी से घुलने वाला उर्वरक है. जिसका इस्तेमाल कर किसान पौधों की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ा सकते हैं. इसका इस्तेमाल खेतों में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से किया जाता है. किसान अपने किसी भी नजदीकी इफको बाजार केंद्र से इस उर्वरक को खरीद सकते हैं.

fertilizer

IFFCO Potassium Sulphate

ऐसे करें दवा का इस्तेमाल

पोटेशियम सल्फेट का इस्तेमाल किसान हर तरह की फसल के लिए कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल आम तौर पर फसलों पर फूल लगने से पहले और फूल लगने के बाद करना चाहिए. ड्रिप सिंचाई के माध्यम से इसका इस्तेमाल करने के लिए पोटेशियम सल्फेट का 1.5 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाना चाहिए. वहीं अगर किसान पत्ती स्प्रे विधि का इसेतमाल कर रहे हैं तो उर्वरक का 0.5 से 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी मे मिलाकर फसल पर फूल आने के बाद छिड़काव करें.

पोटेशियम सल्फेट के फायदे

सबसे पहले बता दें कि पोटेशियम सल्फेट हर तरह की फसल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसेक इस्तेमाल से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है साथ ही पौधों का विकास भी होता है. इसके इस्तेमाल से किसानों की फसलों में फल और फूलों की उपज भी अच्छी होती है. पोटेशियम सल्फेट का इस्तेमाल ग्रीन हाउस और संरक्षित खेती वाली फसलों के लिए सबसे बेस्ट है. फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यह उर्वरक उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने में भी मदद करती है.

Published: 18 May, 2025 | 06:05 PM