गाय-भैंस में ये 5 पोषण की कमी बन सकती हैं जानलेवा! एक गलती और दूध-कमाई दोनों हो जाएगी जीरो, जानें

Dairy Farming Tips: पशुओं को सिर्फ हरा चारा खिलाना उनकी सेहत के लिए काफी नहीं है. विटामिन और मिनरल की कमी से गाय-भैंस में मिल्क फीवर, पाइका रोग, एनीमिया, ग्रास टेटनी और घेंघा जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. इन बीमारियों का सीधा असर दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुपालक की कमाई पर पड़ता है. सही समय पर संतुलित आहार, मिनरल मिक्सचर और जरूरी सप्लीमेंट देकर इन बीमारियों से आसानी से बचाव किया जा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 9 Feb, 2026 | 06:26 PM

Dairy Farming Tips: जैसे इंसानों के लिए संतुलित आहार जरूरी होता है, ठीक उसी तरह पशुओं की सेहत के लिए भी सही पोषण, विटामिन और मिनरल्स बेहद अहम होते हैं. कई बार पशुपालक सिर्फ हरा चारा या एक ही तरह का भोजन पशुओं को देते हैं, जिससे उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. इस कमी का असर सीधे पशुओं के दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और उनकी ताकत पर पड़ता है. गंभीर मामलों में पशु कमजोर होकर बीमार पड़ जाते हैं, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विटामिन और मिनरल की कमी से पशुओं में कई गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं. अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए, तो हालात बिगड़ सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं डेयरी फार्मिंग में एसी ही पांच खतरनाक बीमारियों के बारे में और उनके बचाव के तरीके.

मिल्क फीवर – कैल्शियम की कमी का खतरा

मिल्क फीवर एक गंभीर बीमारी है, जो आमतौर पर नई-नई ब्याने वाली गायों में देखी जाती है. यह रोग शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण होता है. इस स्थिति में गाय बहुत कमजोर हो जाती है, खड़ी नहीं हो पाती और कई बार बुखार जैसे लक्षण भी नजर आते हैं.

इससे बचाव के लिए गाय को नियमित रूप से कैल्शियम युक्त आहार देना चाहिए. हरा चारा, मटर भूसा, मिनरल मिक्सचर और डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम सप्लीमेंट देना फायदेमंद होता है.

पाइका रोग – फास्फोरस की कमी से अजीब आदत

फास्फोरस की कमी से होने वाला पाइका रोग पशुओं में एक अलग तरह की समस्या पैदा करता है. इस बीमारी में गाय लकड़ी, कपड़ा, मिट्टी, हड्डी जैसी गैर-खाद्य चीजें चबाने लगती है. इसका असर दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर पड़ता है.

इस रोग से बचने के लिए चावल की भूसी, मक्का दाना, सरसों खली, मूंगफली खली और संतुलित पशु आहार नियमित रूप से देना चाहिए.

एनीमिया – आयरन की कमी से कमजोरी

पशुओं में आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या होती है. इस रोग में पशु बेहद कमजोर हो जाता है, चलने में परेशानी होती है और सांस फूलने लगती है. गंभीर स्थिति में पशु की मौत भी हो सकती है.

इससे बचाव के लिए बरसीम, मिनरल मिक्सचर और डॉक्टर की सलाह पर आयरन टॉनिक देना जरूरी होता है.

ग्रास टेटनी – मैग्नीशियम की कमी का असर

ग्रास टेटनी मुख्य रूप से मैग्नीशियम की कमी और सिर्फ हरा चारा खिलाने से होती है. इसमें पशु के शरीर में ऐंठन, कंपकंपी, असंतुलन और अत्यधिक कमजोरी देखी जाती है.

इस समस्या से बचने के लिए हरा बाजरा, हरा मक्का, नेपियर घास के साथ रोजाना कम से कम 500 ग्राम मिनरल मिक्सचर देना चाहिए.

आयोडीन की कमी से घेंघा रोग

आयोडीन की कमी से पशुओं में घेंघा रोग हो जाता है, जिसमें गर्दन में सूजन आ जाती है. इसके अलावा बछड़ों में लंगड़ापन और कमजोरी भी देखने को मिलती है.

इससे बचाव के लिए पशुओं के भोजन में हमेशा एक प्रतिशत आयोडाइज्ड नमक मिलाकर देना चाहिए.

संतुलित आहार ही है पशुओं की सेहत की कुंजी

पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए हरा चारा, सूखा चारा और जरूरत के अनुसार दाना मिश्रण देना बेहद जरूरी है. संतुलित आहार न केवल बीमारियों से बचाता है, बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालक की आय बढ़ाने में भी मदद करता है.

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Published: 9 Feb, 2026 | 06:26 PM

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