Watermelon Farming: गर्मी का मौसम आते ही बाजार में एक ऐसा फल दिखाई देता है जिसकी मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है. रस से भरा, ठंडक देने वाला और स्वादिष्ट यह फल केवल कुछ महीनों के लिए मिलता है, इसलिए लोग इसे खरीदने के लिए उत्सुक रहते हैं. अब यही फल किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का जरिया बनता जा रहा है. NHRDF के डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार यह फसल कम अवधि में तैयार होकर अच्छा मुनाफा दे सकती है, अगर किसान सही तरीके से इसकी खेती करें. यह फसल लगभग तीन से चार महीने में तैयार हो जाती है. कम समय में तैयार होने की वजह से किसान साल में दूसरी फसल भी ले सकते हैं. इसी कारण कई किसान अब इस खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.
खेत की सही तैयारी से मिलती है अच्छी पैदावार
डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार इस फसल की सफलता का सबसे पहला कदम है खेत की सही तैयारी. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी नरम और भुरभुरी हो जाए. इससे पौधों की जड़ें आसानी से फैलती हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं. इसके बाद खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद या जैविक खाद डालनी चाहिए. इससे मिट्टी की ताकत बढ़ती है और पौधों को जरूरी पोषण मिलता है. अच्छी तरह तैयार खेत में पौधे मजबूत बनते हैं और फल का आकार भी अच्छा आता है. अगर खेत की तैयारी सही हो तो पैदावार बढ़ने की संभावना भी ज्यादा रहती है.
नर्सरी से तैयार पौधे देते हैं बेहतर परिणाम
विशेषज्ञों के अनुसार सीधे बीज बोने की जगह पहले नर्सरी तैयार करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. नर्सरी तैयार करने में लगभग एक महीना लगता है, लेकिन इससे पौधे मजबूत बनते हैं. सीधे बीज लगाने पर कई बार बीज खराब हो जाते हैं या अंकुरण कम होता है. जबकि नर्सरी से तैयार पौधों को खेत में लगाने पर पौधे जल्दी बढ़ते हैं और ज्यादा सुरक्षित रहते हैं. नर्सरी के पौधे बीमारी का सामना भी बेहतर तरीके से कर लेते हैं. इससे उत्पादन बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है.
सही समय और देखभाल है जरूरी
NHRDF के डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार बुवाई का सबसे अच्छा समय जनवरी माना जाता है, लेकिन मौसम ठीक रहने पर फरवरी की शुरुआत तक रोपाई की जा सकती है. यानी किसानों के पास अभी भी कुछ समय मौजूद रहता है. यह फसल लगभग 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. इसलिए कम समय में किसानों को जल्दी पैसा मिल सकता है. देखभाल में सबसे जरूरी बात है समय-समय पर खेत का निरीक्षण करना. पौधों को कीट और फंगस से बचाना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए. सिंचाई भी संतुलित करनी चाहिए. ज्यादा पानी देने से पौधे खराब हो सकते हैं और कम पानी देने से वृद्धि रुक सकती है. इसलिए सही मात्रा में पानी देना जरूरी है.
कम लागत में ज्यादा कमाई का मौका
विशेषज्ञों के अनुसार उन्नत किस्मों की खेती करने से उत्पादन और कमाई दोनों बढ़ सकते हैं. अच्छी किस्मों से फल का आकार अच्छा मिलता है और बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं. ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करने से पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में पोषण मिलता है. घुलनशील उर्वरक जैसे 19-19-19, 12-61-00 और 52-34 का उपयोग करने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं. एक बीघा खेत में लगभग 50 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है. अगर बाजार भाव अच्छा रहा तो किसान लागत से दो से तीन गुना तक कमाई कर सकते हैं.
किसानों के लिए बन रही नई उम्मीद
NHRDF के डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार यह फसल कम समय में तैयार होकर किसानों को जल्दी आय देती है. यही वजह है कि अब कई किसान इसे अपनाने लगे हैं. कम अवधि, कम जोखिम और अच्छी कमाई की संभावना इस खेती को खास बनाती है. अगर किसान सही तरीके से खेती करें तो यह उनके लिए कमाई का अच्छा साधन बन सकती है. गर्मी के मौसम में इस फल की मांग ज्यादा रहती है. इसलिए सही समय पर खेती करने वाले किसानों को अच्छा फायदा मिल सकता है. आने वाले समय में यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.