Agriculture News: केंद्र सरकार ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेते हुए खरीफ सजीन की शुरुआत होने से पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का कहना है कि किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बेहतर जल प्रबंधन, नई तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु के अनुकूल खेती के जरिए संभावित समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार किसानों को सिंचाई को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. जलाशयों में प्रयाप्त मात्रा में पानी उपलब्ध है. उन्होंने कहा है कि सरकार का फोकस फसल के अनुसार अलग रणनीति बनाने पर है, ताकि किसानों को समय पर सलाह, बीज, संसाधन और जरूरी विकल्प मिल सकें.
दरअसल, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने कृषि सचिव और अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के हित में सभी जरूरी इंतजाम समय पर पूरे किए जाएं. बैठक में मौसम पूर्वानुमान, पानी की उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज और अन्य जरूरी कृषि सामग्री की व्यवस्था, राज्यों की तैयारी और खराब मौसम से निपटने की योजना पर चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि किसानों का हित सबसे जरूरी है और संभावित अल नीनो के असर को देखते हुए सरकार पूरी तरह तैयार है.
सरकार मौसम पूर्वानुमानों को गंभीरता से ले रही है
बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है और देश में कुल बारिश लगभग 92 फीसदी तक रहने का अनुमान है. साथ ही मॉनसून के दौरान अल नीनो बनने की भी संभावना जताई गई है, हालांकि इसका अंतिम अपडेट मई 2026 के आखिरी हफ्ते में आएगा. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार इन मौसम पूर्वानुमानों को गंभीरता से ले रही है और पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है, इसलिए किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बेहतर जल प्रबंधन, नई तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु के अनुकूल खेती के जरिए संभावित समस्याओं को काफी हद तक संभाल सकते हैं.
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जलाशयों में पानी का कितना है सामान्य स्तर
बैठक में बताया गया कि देश के जलाशयों में पानी की स्थिति फिलहाल अच्छी है और कुल भंडारण सामान्य से बेहतर है. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार जलाशयों का पानी सामान्य स्तर के मुकाबले लगभग 127 फीसदी है. इससे खरीफ सीजन में सिंचाई की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और पानी की कमी का खतरा काफी कम हो जाएगा. इसी आधार पर कहा गया कि संभावित अल नीनो के बावजूद कृषि पर इसका असर पहले की तुलना में कम रहने की उम्मीद है. बेहतर जल उपलब्धता, सूक्ष्म सिंचाई, वैज्ञानिक सलाह, फसल विविधीकरण और समय पर सरकारी मदद के कारण खेती अब पहले से ज्यादा मजबूत और अनुकूल हो गई है.
क्या बोले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का फोकस फसल के अनुसार अलग रणनीति बनाने पर है, ताकि किसानों को समय पर सलाह, बीज, संसाधन और जरूरी विकल्प मिल सकें. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी राज्य किसी भी खराब मौसम की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और जिला स्तर पर आपात योजनाओं को सक्रिय रखा जाए. उन्होंने कहा कि बीज, खाद और अन्य जरूरी कृषि सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. साथ ही वैकल्पिक फसलें, देर से बुवाई की रणनीति और सूखा सहन करने वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों को तुरंत और व्यावहारिक समाधान मिल सके.
खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए बीज है उपलब्ध
बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय बीज भंडार की व्यवस्था भी की गई है. इसका उद्देश्य यह है कि अगर किसी क्षेत्र में मौसम खराब हो, तो वहां तुरंत वैकल्पिक और उपयुक्त बीज उपलब्ध कराए जा सकें. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए निगरानी व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है और हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है. राज्यों के साथ नियमित समन्वय, मौसम और फसल की निगरानी, जिला स्तर की आपात योजनाओं का अपडेट और संकट प्रबंधन व्यवस्था के जरिए समय पर फैसले लिए जा रहे हैं.