सी फूड निर्यात में दुनिया का किंग बना भारत, एक साल में 73890 करोड़ की कमाई.. अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात रिकॉर्ड 73,890 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. फ्रोजन झींगा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा, जबकि अमेरिका और चीन प्रमुख बाजार बने रहे. फ्रोजन मछली और सूखे समुद्री उत्पादों के निर्यात में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.
Sea exports: भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात ने नया रिकॉर्ड बनाया है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात हुआ, जिसकी कुल कीमत 73,890.46 करोड़ रुपये रही. समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अध्यक्ष पी. जवाहर ने सोमवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के समुद्री उत्पादों की विदेशी बाजारों में मांग मजबूत बनी रही. एमपीईडीए के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और चीन भारतीय समुद्री उत्पादों के सबसे बड़े खरीदार रहे. वहीं, फ्रोजन झींगा निर्यात में सबसे प्रमुख उत्पाद बना रहा और कुल निर्यात में इसका सबसे बड़ा योगदान रहा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रोजन झींगा भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात में सबसे बड़ा उत्पाद बना रहा. वर्ष 2025-26 में इसके निर्यात से 49,037.93 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो कुल समुद्री निर्यात मूल्य का 66.5 प्रतिशत हिस्सा है. इस दौरान देश ने 7.93 लाख मीट्रिक टन फ्रोजन झींगा का निर्यात किया. झींगा निर्यात में रुपये के हिसाब से 13.16 प्रतिशत और डॉलर के हिसाब से 8.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
2.56 लाख मीट्रिक टन झींगा निर्यात
फ्रोजन झींगा के लिए अमेरिका भारत का सबसे बड़ा बाजार रहा, जहां 2.56 लाख मीट्रिक टन झींगा निर्यात किया गया. इसके बाद चीन (1.69 लाख टन), यूरोपीय संघ (1.36 लाख टन), दक्षिण-पूर्व एशिया (83,810 टन), जापान (40,776 टन) और मध्य पूर्व (30,478 टन) का स्थान रहा. एमपीईडीए के अध्यक्ष पी. जवाहर ने कहा कि व्हाइटलेग श्रिम्प (एल. वैनामी) और ब्लैक टाइगर श्रिम्प के निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों के स्तर पर अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली.
फ्रोजन मछली भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात में दूसरे स्थान पर रही. इससे 5,658.37 करोड़ रुपये की कमाई हुई. वहीं, सूखे समुद्री उत्पाद (Dried Products) तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनकर उभरे, जिनसे 5,079.09 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ. खास बात यह रही कि सूखे उत्पादों के निर्यात मूल्य में 78 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
फ्रोजन स्क्विड का निर्यात किया गया
वित्त वर्ष 2025-26 में 1.02 लाख मीट्रिक टन फ्रोजन स्क्विड का निर्यात किया गया, जिससे 4,493.80 करोड़ रुपये की आय हुई. वहीं, फ्रोजन कटलफिश के निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसका निर्यात 13.32 प्रतिशत बढ़कर 67,157 मीट्रिक टन पहुंच गया, जबकि डॉलर के हिसाब से इसकी कमाई 16.25 प्रतिशत बढ़कर 331.96 मिलियन डॉलर रही. इसके अलावा, चिल्ड (ताजे और ठंडे रखे गए) समुद्री उत्पादों के निर्यात से 622.31 करोड़ रुपये की कमाई हुई. वहीं, जीवित समुद्री उत्पादों के निर्यात से होने वाली आय में 11.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 62.43 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई.
अमेरिका भारतीय समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार
विदेशी बाजारों की बात करें तो मूल्य के लिहाज से अमेरिका भारतीय समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा. वर्ष 2025-26 में अमेरिका ने भारत से 2.79 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद आयात किए, जिनकी कुल कीमत 20,263.27 करोड़ रुपये रही. हालांकि, अमेरिका को होने वाले समुद्री उत्पाद निर्यात में गिरावट दर्ज की गई. वर्ष 2025-26 में अमेरिका को निर्यात का मूल्य रुपये के हिसाब से 10.82 प्रतिशत, डॉलर के हिसाब से 14.22 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 19.51 प्रतिशत घट गया. अमेरिका को भेजे गए भारतीय समुद्री उत्पादों में फ्रोजन झींगा का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा, जो कुल निर्यात मूल्य का 93.55 प्रतिशत था. मात्रा के लिहाज से चीन भारत के समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा. चीन ने 4.90 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद आयात किए. वहीं, यूरोपीय संघ (EU) मूल्य के आधार पर तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा. उसने भारत से 2.98 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद खरीदे.