Animal Husbandry: गाय-भैंस की Deworming नहीं करवाई, तो हर महीने दूध और पैसा दोनों में होगा नुकसान! जानें

Pashu Palan Ke Tips: दुधारू पशुओं में डिवार्मिंग (कृमिनाशन) करना उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है. आंतों में मौजूद कीड़े पशु के पोषण को खत्म कर देते हैं, जिससे कमजोरी और दूध में कमी आती है. वेटरनरी एक्सपर्ट डॉ. पूजा दीक्षित के अनुसार, समय पर दवा, संतुलित आहार, साफ पानी और सही देखभाल से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 17 Mar, 2026 | 11:30 PM

Animal Hubsandry: मौसम में बदलाव का असर सीधे दुधारू पशुओं पर पड़ता है. कई पशुपालक शिकायत करते हैं कि उनकी गाय या भैंस अचानक कम दूध देने लगती हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं पाचन खराब होना, कमजोरी, प्रसव के बाद थकावट या चारा कम खाना. रीवा मेडिकल कॉलेज की वेटरनरी एक्सपर्ट डॉ. पूजा दीक्षित के अनुसार, सही देखभाल और समय पर डिवार्मिंग (Deworming) कराने से पशुओं का स्वास्थ्य सुधरता है और दूध उत्पादन में सुधार आता है.

स्वस्थ पशु मतलब अधिक दूध

अगर दुधारू पशु स्वस्थ और ताकतवर होगा, तो दूध उत्पादन अपने आप बढ़ जाएगा. इसके लिए जरूरी है-

  • संतुलित आहार
  • साफ पानी
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच

कई बार पशुपालक पशु की कमजोरी या भूख कम होने को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित होता है.

डिवार्मिंग क्यों जरूरी है

डॉ. पूजा दीक्षित के अनुसार, पशुओं के शरीर में रहने वाले कीड़े उनके पोषण को खा लेते हैं. ये कीड़े आंतों में रहते हुए पशु द्वारा खाए गए चारे से अपना पोषण प्राप्त करते हैं, जिससे पशु कमजोर और थका हुआ लगता है. समय-समय पर डिवार्मिंग कराने से कीड़े बाहर निकल जाते हैं और पशु द्वारा लिया गया आहार सीधे उसके शरीर के विकास और दूध उत्पादन में इस्तेमाल होने लगता है. इससे:

  • पशु का स्वास्थ्य सुधरता है
  • दूध और अन्य उत्पादन में बढ़ोतरी होती है
  • पशु अधिक मजबूत और सक्रिय रहता है

डिवार्मिंग का समय और तरीका

दुधारू पशुओं में सामान्य रूप से हर तीन महीने में डिवार्मिंग कराना आवश्यक माना जाता है, हालांकि जरूरत पड़ने पर एक महीने के अंतराल पर भी कृमिनाशक दवा दी जा सकती है. आमतौर पर एल्बेंडाजोल (Albendazole) जैसी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है, जो पशुओं में मौजूद कीड़ों को खत्म करने में असरदार होती है. इस दवा को पशुओं को रोटी, आटा या पानी के साथ आसानी से खिलाया जा सकता है. साथ ही, बड़े पशुओं के साथ-साथ बछड़ों को भी कम मात्रा में यह दवा देना जरूरी होता है, ताकि उनकी ग्रोथ और सेहत बेहतर बनी रहे.

किन लक्षणों पर ध्यान दें

अगर पशु में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डिवार्मिंग और पशु चिकित्सक की सलाह लें:

  • पेट दर्द या दस्त
  • कमजोरी और भूख कम लगना
  • अचानक वजन घटना
  • मल में कीड़े दिखाई देना

इसके साथ संतुलित आहार, हरी घास, भूसा, दाने और साफ पानी देना जरूरी है. हल्की टहल और खुला वातावरण भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. कुछ पशुपालक सौंफ और गुड़ का पानी भी पिलाते हैं, जो पाचन सुधारने में मदद करता है. डिवार्मिंग सिर्फ बीमारी से बचाव का उपाय नहीं, बल्कि दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन को बढ़ाने का सबसे असरदार तरीका है. सही समय पर दवा और संतुलित देखभाल से किसान अपनी गाय और भैंस से अधिक लाभ कमा सकते हैं.

 

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Published: 17 Mar, 2026 | 11:30 PM
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