Animal Nutrition: गर्मी आते ही मौसम तेजी से बदलने लगता है. सुबह-शाम हल्की ठंडक और दिन में बढ़ती गर्मी का असर सबसे पहले पशुओं की सेहत पर दिखता है. कई बार पशुपालक समझ ही नहीं पाते कि पशु अचानक मिट्टी, दीवार, लकड़ी या अपना ही मूत्र क्यों चाटने लगे. यह कोई सामान्य आदत नहीं, बल्कि शरीर में खनिज लवण, खासकर फॉस्फोरस की कमी का संकेत हो सकता है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, अप्रैल में पशुओं को संतुलित आहार, खनिज मिश्रण और हरे चारे पर खास ध्यान देना जरूरी है, ताकि दूध उत्पादन और पशु की ताकत दोनों बनी रहे.
मिट्टी या मूत्र चाटना किस बात का संकेत है
बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, गांवों में कई बार लोग इसे पशु की आदत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह पाड़का के लक्षण हो सकते हैं. विभाग के अनुसार जब पशु के शरीर में फॉस्फोरस और दूसरे जरूरी लवणों की कमी हो जाती है, तो वह मिट्टी, दीवार, ईंट, राख या मूत्र तक चाटने लगता है. यह स्थिति लंबे समय तक रहे तो पशु कमजोर होने लगता है, चारा कम खाता है और दूध भी घटने लगता है. कई बार प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है. इसलिए जैसे ही ऐसे लक्षण दिखें, तुरंत चारे में खनिज लवण मिश्रण (Mineral Mixture) मिलाना शुरू करें.
खनिज और पोषण के लिए एजोला घास है आसान उपाय
बिहार पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों को सलाह दी है कि अप्रैल में पशुओं के आहार में एजोला घास जरूर शामिल करें. एजोला एक ऐसा हरा पौष्टिक चारा है, जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे घर पर छोटे गड्ढे, टंकी या प्लास्टिक शीट में भी आसानी से उगाया जा सकता है. कम खर्च में तैयार होने वाला यह चारा दूध बढ़ाने और पशु को ताकत देने में मदद करता है. खासकर दुधारू पशुओं के लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है. अगर पशुपालक रोज थोड़ा-थोड़ा एजोला चारे में मिलाकर दें, तो पशु की कमजोरी कम होती है और दूध उत्पादन में भी सुधार देखने को मिलता है.
हरे चारे की कटाई का सही समय जानना जरूरी
अप्रैल में जिन किसानों ने मक्का, बाजरा और ज्वार हरे चारे के लिए बोया है, उनके लिए सही समय पर कटाई करना बहुत जरूरी है. विभाग के अनुसार इन फसलों की कटाई 45 से 50 दिन की अवस्था में करनी चाहिए. इस समय चारा सबसे ज्यादा पौष्टिक होता है और पशु इसे आसानी से पचा लेते हैं. अगर कटाई देर से की गई तो चारा सख्त हो जाता है, जिससे पोषण कम मिलता है और पशु कम खाते हैं. हरे चारे की सही उम्र पर कटाई से दूध देने वाले पशुओं को ऊर्जा, पानी और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. इससे गर्मी की शुरुआत में भी पशु स्वस्थ बने रहते हैं.
अप्रैल में इन बातों का रखें खास ध्यान
अप्रैल में मौसम बदलने से पशुओं में पानी की जरूरत भी बढ़ जाती है. इसलिए उन्हें दिन में कई बार साफ और ताजा पानी जरूर दें. चारे में सूखा और हरा दोनों संतुलित मात्रा में रखें. साथ ही खनिज लवण मिश्रण रोजाना देना न भूलें. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, अगर पशुपालक इस महीने पोषण, हरे चारे और खनिज की कमी पर ध्यान दे दें, तो गर्मी में दूध घटने, कमजोरी और बीमारी जैसी दिक्कतों से काफी हद तक बचा जा सकता है. छोटी-छोटी सावधानियां ही पशुपालन को फायदे का व्यवसाय बनाती हैं. सही चारा, सही समय पर कटाई और खनिज मिश्रण का इस्तेमाल पशुओं को स्वस्थ रखेगा और पशुपालकों की कमाई भी बढ़ाएगा.