क्यों पटाखों की तेज आवाज से डरकर दूध देना कम कर देते हैं पशु? पशु चिकित्सक ने बताई बड़ी वजह

पटाखों की तेज आवाज पशुओं के लिए गंभीर तनाव का कारण बन सकती है. अचानक होने वाले धमाके से पशु डर जाते हैं और उनका व्यवहार बदल जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार डर के कारण दूध देने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. इसलिए पशुपालकों को ऐसे समय में पशुओं को शांत और सुरक्षित वातावरण देना जरूरी है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 Mar, 2026 | 02:50 PM

Animal Stress: त्योहारों या शादियों के मौसम में पटाखों की आवाज आम बात है. लोग खुशी मनाने के लिए पटाखे जलाते हैं, लेकिन इसका असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता. तेज आवाज से पशु भी बुरी तरह घबरा जाते हैं. कई बार डर और तनाव के कारण वे खाना-पीना छोड़ देते हैं और दूध देने वाले पशुओं का दूध भी कम हो जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम ने किसान इंडिया से बातचीत में बताया कि अगर पशुपालक थोड़ी सावधानी बरतें, तो इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

तेज आवाज से डर और तनाव में आ जाते हैं पशु

पटाखों की तेज आवाज पशुओं के लिए बहुत ज्यादा तनाव पैदा करती है. जब अचानक तेज धमाका होता है तो पशु घबरा जाते  हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि यह आवाज कहां से आ रही है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम ने बताया कि तेज आवाज सुनकर पशुओं के शरीर में डर की प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है. वे बेचैन हो जाते हैं, इधर-उधर भागने लगते हैं या एक ही जगह पर सहमे हुए खड़े रहते हैं. लगातार शोर होने पर उनका तनाव और बढ़ जाता है.

डर की वजह से रुक सकता है दूध निकलने का प्रक्रिया

दूध देने वाले पशुओं पर पटाखों का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. डर लगने पर उनके शरीर में एड्रेनालाईन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं. इन हार्मोन की वजह से दूध निकलने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि डर के कारण पशु दूध देना कम  कर देते हैं या कुछ समय के लिए दूध देना बंद कर देते हैं. इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.

घबराहट में पशु खाना-पीना भी छोड़ देते हैं

जब पशु बहुत ज्यादा डर जाते हैं तो उनका व्यवहार भी बदल जाता है. वे सामान्य रूप से चारा नहीं खाते और पानी भी कम पीते हैं. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है. खाना-पीना कम होने से शरीर कमजोर होने लगता है और दूध उत्पादन  भी कम हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि पशुपालक अपने पशुओं को शांत और सुरक्षित वातावरण दें.

जानवरों की सुनने की क्षमता होती है ज्यादा

पशुओं की सुनने की क्षमता इंसानों से कई गुना ज्यादा होती है. इसलिए जो आवाज इंसानों को सामान्य लगती है, वही पशुओं को बहुत तेज और परेशान करने वाली लग सकती है. पटाखों की आवाज उनके कानों को तेज झटका देती है, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी होती है. यही कारण है कि अचानक तेज आवाज होने पर पशु डरकर भागने लगते हैं या घबराकर असामान्य व्यवहार  करने लगते हैं.

पशुपालक इन बातों का रखें खास ध्यान

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर आसपास पटाखे चलने की संभावना हो तो पशुपालकों को पहले से कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. पशुओं को सुरक्षित और शांत जगह पर बांधना चाहिए, जहां शोर कम पहुंचे. उनके पास पर्याप्त चारा  और पानी उपलब्ध होना चाहिए. अगर पशु ज्यादा घबराए हुए लगें तो उन्हें शांत करने की कोशिश करनी चाहिए और जरूरत पड़े तो पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन बनाए रखने के लिए उन्हें तनाव से बचाना बेहद जरूरी है. थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से पशुपालक अपने पशुओं को पटाखों के नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं.

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