गर्मियों में पशुओं को खिलाएं हरा चारा, बढ़ेगा दूध उत्पादन और हीट स्ट्रेस से भी मिलेगी राहत

गर्मियों के मौसम में पशुओं की सेहत बनाए रखने के लिए हरा चारा बहुत जरूरी माना जाता है. बरसीम और ज्वार जैसे चारे पशुओं को जरूरी पोषण देते हैं और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते. विशेषज्ञों के अनुसार इससे दूध उत्पादन भी बढ़ता है और पशु हीट स्ट्रेस से बचे रहते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Mar, 2026 | 08:22 PM

Green Fodder: गर्मी का मौसम आते ही इंसानों के साथ-साथ पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ने लगता है. तेज धूप और लू के कारण कई बार दुधारू पशुओं का दूध कम हो जाता है और वे कमजोर भी पड़ने लगते हैं. ऐसे में अगर पशुपालक कुछ आसान उपाय अपनाएं और अपने पशुओं को सही हरा चारा खिलाएं, तो न सिर्फ उनकी सेहत अच्छी रहेगी बल्कि दूध उत्पादन भी बढ़ सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, गर्मियों में हरा चारा पशुओं के लिए किसी दवा से कम नहीं होता.

गर्मियों में पशुओं को हरा चारा देना क्यों जरूरी

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गर्मियों में पशुओं  के शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है. इससे उनका पाचन कमजोर पड़ सकता है और दूध उत्पादन भी कम होने लगता है. अगर इस मौसम में पशुओं को हरा चारा दिया जाए, तो उनके शरीर को जरूरी पोषण और नमी दोनों मिलती है. हरे चारे में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे पशु हाइड्रेटेड रहते हैं और गर्मी का असर कम होता है. यही वजह है कि पशुपालकों को गर्मियों में अपने पशुओं के आहार में हरा चारा जरूर शामिल करना चाहिए.

बरसीम चारा बढ़ाता है दूध और सेहत

विशेषज्ञों के मुताबिक बरसीम गर्मियों में पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद चारा माना जाता है. इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो पशुओं के शरीर को ताकत देता है. बरसीम खिलाने से दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ता है और पाचन भी बेहतर रहता है. इसके अलावा यह शरीर को ठंडक देता है, जिससे पशुओं को गर्मी से राहत मिलती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम बताते हैं कि अगर पशुपालक अपने खेत में बरसीम उगाते हैं, तो उन्हें चारे की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और पशुओं की सेहत भी अच्छी बनी रहेगी.

ज्वार (चरी) भी गर्मियों का बेहतरीन चारा

गर्मियों में ज्वार यानी चरी भी पशुओं के लिए बहुत अच्छा चारा माना जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व  पाए जाते हैं. ज्वार का हरा चारा आसानी से पच जाता है और पशुओं को ऊर्जा देता है. इससे दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ता है और दूध की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में हरा ज्वार पशुओं के शरीर को ठंडक देता है और उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है.

कम लागत में खेत में उगा सकते हैं हरा चारा

पशुपालकों के लिए अच्छी बात यह है कि हरा चारा उगाना ज्यादा महंगा नहीं होता. ज्वार की खेती कम पानी  और कम खर्च में आसानी से की जा सकती है. खेती के जानकारों के अनुसार, ज्वार की बुवाई रेतीली-दोमट मिट्टी में करना अच्छा रहता है. एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 40 से 50 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है. अगर खेत में पानी की निकासी का सही प्रबंधन हो, तो यह फसल अच्छी तरह बढ़ती है. ज्वार की फसल लगभग 60 से 70 दिनों में पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है और इससे कई बार चारा लिया जा सकता है.

हीट स्ट्रेस से बचाने में भी मददगार

गर्मियों में तेज लू और ज्यादा तापमान के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस  की समस्या बढ़ जाती है. इससे पशु सुस्त हो जाते हैं, भूख कम लगती है और दूध भी कम देने लगते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, अगर पशुओं को हरा चारा जैसे बरसीम और ज्वार दिया जाए, तो उनके शरीर को ठंडक मिलती है और पानी की कमी भी नहीं होती.

साथ ही पशुपालकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पशुओं को साफ और ठंडा पानी मिले, रहने की जगह साफ हो और धूप से बचाव के लिए छाया की व्यवस्था हो. अगर पशुपालक इन आसान बातों का ध्यान रखें, तो गर्मियों में भी उनके पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन में कमी नहीं आएगी.

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Published: 15 Mar, 2026 | 08:22 PM
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