गन्ना फसल में नहीं लगेंगे कीट और बीमारियां, फसल पोषक तत्वों का सटीक इस्तेमाल बढ़ाएगा उत्पादन.. ट्रेनिंग शुरू

Sugarcane Farming Training: उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री के निर्देश पर राज्य के बड़े गन्ना उत्पादक इलाकों की गन्ना समिति के अध्यक्ष और उनसे जुड़े लोगों को ट्रेनिंग देने की पहल की है. इससे गन्ना किसानों को जागरूक कर उत्पादन के साथ क्वालिटी को और बेहतर किया जा सके. जबकि, किसानों की लागत घटाना भी अहम बिंदु है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 4 Feb, 2026 | 01:36 PM

गन्ना किसानों को बीमारियों और कीटों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए गन्ना समितियों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत कर दी गई है. इसके तहत गन्ना फसल में इस्तेमाल होने वाली खाद और पोषक तत्वों के सटीक मात्रा की सही जानकारी मिलेगी जो उत्पादन और क्वालिटी को बेहतर करेगी. वहीं, पारंपरिक खाद से मिट्टी और फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा. इसके लिए प्रयागराज के फूलपुर स्थित गन्ना विकास केंद्र पर कई जिलों की विकास समितियों से जुड़े लोगों को इफको की मदद से ट्रेनिंग दी जा रही है.

गन्ना मंत्री ने पैदावार बढ़ाने और लागत कम करने के निर्देश दिए

उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के निर्देश पर सहकारी गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों और उससे जुड़े लोगों को गन्ना की पैदावार और क्वालिटी को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं. गन्ना मंत्री के निर्देश पर गन्ना फसल में नैनो और लिक्विड पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल के लिए जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण देने की पहल शुरू की गई है.

गन्ना एवं चीनी आयुक्त ने उत्पादन बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कराया

उत्तर प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि गन्ना की खेती को और अधिक उत्पादन और कमाई के लिहाज से बेहतर करने के लिए इफको के सहयोग से मोतीलाल नेहरू फारमर्स ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट फूलपुर प्रयागराज 3 फरवरी से स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया है. इसमें गन्ना विकास समितियों से जुड़े लोगों को वर्तमान जलवायु परिस्थितियों के अनुसार फसल उत्पादन, लागत और क्वालिटी के नजरिए से जागरूक किया जा रहा है.

नैनो और घुलनशील पोषक तत्वों के इस्तेमाल की सटीक जानकारी

ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्देश्य इफको के उत्पाद जैसे नैनों और लिक्विड फर्टिलाइजर के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. इसके प्रति गन्ना समिति अध्यक्षों को जागरूक करना है. गन्ना खेती में प्रयोग किये जा रहे असंतुलित पारंपरिक यूरिया, डीएपी से हो रहे जल, मिट्टी और वायु प्रदूषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभावों को कम करने मे नैनो और घुलनशील पोषक तत्व अहम भूमिका निभा सकते हैं.

गन्ना किसानों की लागत घटेगी और कमाई में इजाफा होगा

गन्ना खेती में उर्वरकों के संतुलित उपयोग से किसानों की लागत कम करने में मदद तो मिलेगी ही, इसके साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. गन्ना समिति के अध्यक्ष ट्रेनिंग लेकर अपनी समिति से जुड़े गन्ना किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाएंगे. ट्रेनिंग प्रोग्राम में सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली परिक्षेत्र के समिति अध्यक्षों के साथ साथ कोर्डिनेटर के रूप में परिक्षेत्र अधिकारियों तकनीकों से जागरूक किया जा रहा है.

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Published: 4 Feb, 2026 | 01:21 PM

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