स्वाद और सेहत दोनों में नंबर-1, रसभरी की खेती से होगा किसानों को लाखों का मुनाफा- ऐसे करें शुरुआत

रसभरी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसके लिए बहुत बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती. अगर किसान सिर्फ दो बीघा जमीन में भी इसकी खेती करता है, तो साल भर में 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. बड़े शहरों में होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और फल मंडियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 4 Feb, 2026 | 01:13 PM

Rasbhari farming: आज का किसान सिर्फ गेहूं, धान या सरसों तक सीमित नहीं रहना चाहता. बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितता ने किसानों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऐसी कौन-सी फसल उगाई जाए, जिसमें जोखिम कम हो और मुनाफा ज्यादा मिले. इसी तलाश में रसभरी की खेती किसानों के लिए एक उम्मीद बनकर सामने आ रही है. स्वाद में बेहतरीन और बाजार में अच्छी मांग रखने वाली रसभरी अब धीरे-धीरे किसानों की पसंद बनती जा रही है.

रसभरी एक ऐसा फल है, जो देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं. इसे कई जगह ग्राउंड चेरी भी कहा जाता है. पहले यह फल विदेशी माना जाता था, लेकिन अब भारत की जलवायु में भी इसकी खेती आसानी से की जा रही है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी खेती छोटे किसान भी कम जमीन में कर सकते हैं और अच्छी कमाई हासिल कर सकते हैं.

भारत के मौसम में क्यों फिट बैठती है रसभरी

रसभरी की खेती के लिए बहुत ज्यादा खास मौसम की जरूरत नहीं होती. 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन 15 डिग्री तक का तापमान भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाता. यही वजह है कि उत्तर भारत, मध्य भारत और कुछ पहाड़ी इलाकों में भी इसकी खेती सफल हो रही है. जब पौधों में एक बार फल आना शुरू हो जाता है, तो करीब तीन महीने तक लगातार फल मिलते रहते हैं. इससे किसान को एक ही मौसम में बार-बार तुड़ाई और बिक्री का मौका मिलता है.

कम जमीन, लेकिन कमाई दमदार

रसभरी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसके लिए बहुत बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती. अगर किसान सिर्फ दो बीघा जमीन में भी इसकी खेती करता है, तो साल भर में 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. बड़े शहरों में होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और फल मंडियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ताजा फल के अलावा इसका इस्तेमाल सजावट, जैम और कुछ आयुर्वेदिक उत्पादों में भी किया जाता है, जिससे इसकी कीमत अच्छी मिलती है.

मिट्टी और खेत की तैयारी का सही तरीका

रसभरी लगभग हर तरह की मिट्टी में उग जाती है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. खेत में पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. अगर पानी ज्यादा देर तक रुका रहा, तो पौधों की जड़ें गल सकती हैं. इसी वजह से किसान रसभरी की खेती ऊंची क्यारियों में करते हैं. जमीन से 20 से 25 सेंटीमीटर ऊंची क्यारियां बनाने से बारिश और सिंचाई का पानी आसानी से निकल जाता है और पौधे सुरक्षित रहते हैं.

सही समय पर रोपाई से बढ़ता है उत्पादन

रसभरी की पौध आमतौर पर जुलाई महीने में लगाई जाती है. इसके बाद सर्दियों के मौसम में पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं और जनवरी से फल देना शुरू कर देते हैं. फरवरी और मार्च तक इसकी तुड़ाई चलती रहती है. इस दौरान खेत की नियमित देखभाल जरूरी होती है. खरपतवार यानी बेकार घास रसभरी की खेती में परेशानी पैदा कर सकती है, इसलिए तीन से चार बार गुड़ाई करना जरूरी होता है. इससे पौधों को पूरा पोषण मिलता है और उत्पादन भी बढ़ता है.

खाद और पानी का संतुलन जरूरी

रसभरी की खेती में महंगी खाद की जरूरत नहीं होती. सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद से ही पौधे अच्छी तरह विकसित हो जाते हैं. अगर किसान चाहें तो जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इससे फल का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं. सिंचाई की बात करें तो पूरे मौसम में तीन से चार बार पानी देना काफी होता है. ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए.

बाजार में बढ़ती मांग

आज के समय में लोग स्वाद के साथ-साथ सेहत को भी महत्व देने लगे हैं. रसभरी में पोषक तत्व होते हैं और इसका स्वाद भी लोगों को पसंद आता है. यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. आने वाले समय में रसभरी की खेती किसानों के लिए और भी फायदे का सौदा बन सकती है.

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