17 से 20 मार्च के बीच रबी फसल पर मौसम की मार का खतरा, महाराष्ट्र कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

मौसम विभाग के अनुसार विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के हिस्सों में दोपहर के समय बादल छाने और तेज मौसमीय गतिविधियों की संभावना जताई गई है. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Mar, 2026 | 09:27 AM

Maharashtra weather advisory: महाराष्ट्र में मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए राज्य के कृषि विभाग ने किसानों और आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग के शुरुआती पूर्वानुमान के आधार पर सरकार ने बताया है कि 17 मार्च से 20 मार्च के बीच राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना है. ऐसे हालात में खेतों में खड़ी फसल और कटाई के बाद खुले में रखी उपज को नुकसान पहुंच सकता है. इसी कारण कृषि विभाग ने किसानों से सावधानी बरतने और समय रहते जरूरी कदम उठाने की अपील की है.

कई क्षेत्रों में मौसम बिगड़ने की आशंका

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है. विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के हिस्सों में दोपहर के समय बादल छाने और तेज मौसमीय गतिविधियों की संभावना जताई गई है. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है.

जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि इन मौसमीय घटनाओं की तीव्रता 18 मार्च से 20 मार्च के बीच सबसे ज्यादा रह सकती है. इसलिए किसानों को इस अवधि के दौरान खेतों में काम करते समय और फसलों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्क रहने की जरूरत है.

रबी फसलों के लिए संवेदनशील समय

डीडी न्यूज की खबर के अनुसार, इस समय महाराष्ट्र में रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है. कई जगहों पर गेहूं और हरभरा (चना) जैसी फसलें कटाई के लिए तैयार हैं, जबकि कुछ खेतों में कटाई के बाद फसल खुले में रखी हुई है. ऐसे समय में अचानक बारिश, ओलावृष्टि या तेज हवाएं किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती हैं.

कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह किसानों के लिए बेहद संवेदनशील समय है. अगर समय पर सावधानी नहीं बरती गई तो खेतों में खड़ी फसल और कटाई के बाद रखी उपज दोनों को नुकसान हो सकता है.

किसानों को सतर्क रहने की सलाह

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे मौसम से जुड़ी दैनिक जानकारी पर लगातार नजर रखें और उसी के अनुसार खेती से जुड़े कामों की योजना बनाएं. विभाग ने यह भी सुझाव दिया है कि कटाई के बाद तैयार फसल को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए. यदि गोदाम या पक्का भंडारण उपलब्ध न हो तो फसल को प्लास्टिक शीट या तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखा जाए, ताकि बारिश और तेज हवा से नुकसान न हो.

साथ ही खड़ी फसलों को ओलावृष्टि और तेज हवाओं से बचाने के लिए भी आवश्यक उपाय करने की सलाह दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि फलों के बागानों में यदि संभव हो तो ओला सुरक्षा जाल लगाने से काफी हद तक नुकसान को रोका जा सकता है.

प्री-मानसून मौसम की वजह से बनती है ऐसी स्थिति

कृषि विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में मार्च के मध्य के दौरान इस तरह का मौसम अक्सर देखने को मिलता है. यह समय प्री-मानसून संक्रमण काल का होता है. इस दौरान जमीन का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे वातावरण में अस्थिरता पैदा होती है.

जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाएं इस गर्म और शुष्क हवा से टकराती हैं तो बादलों का तेजी से विकास होता है और दोपहर के समय अचानक गरज-चमक वाले तूफान बन जाते हैं. इसी वजह से इस अवधि में कई बार तेज आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं देखने को मिलती हैं.

पशुओं और खेतों की सुरक्षा पर भी जोर

एडवाइजरी में किसानों को अपने पशुओं की सुरक्षा पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई है. तेज आंधी और बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए पशुओं को मजबूत शेड में रखना चाहिए और उन्हें पेड़ों के नीचे नहीं बांधना चाहिए. इसके अलावा खेतों में जलभराव से बचने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था रखने की भी सलाह दी गई है.

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर नजर रखें और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें. समय रहते सावधानी बरतने से फसल और पशुधन दोनों को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है.

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