अल नीनो की दस्तक, बढ़ेगा तापमान और बिगड़ सकता है मानसून, रिपोर्ट में चेतावनी

El Nino 2026 India impact: रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के मध्य तक भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम और असमान हो सकती है. इसका मतलब यह है कि कहीं ज्यादा बारिश होगी तो कहीं बिल्कुल कम, जिससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ेगा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 19 Mar, 2026 | 08:34 AM

El Nino 2026 India impact: दुनिया भर में मौसम एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ता दिख रहा है. एपीईसी क्लाइमेट सेंटर (APEC Climate Center – APCC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति बनने की आशंका है. इसका सीधा असर तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ेगा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जबकि बारिश असमान रूप से होगी. भारत समेत कई क्षेत्रों में बारिश कम होने और सूखे जैसे हालात बनने की संभावना जताई गई है.

क्या होता है अल नीनो और क्यों बढ़ती है चिंता

अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है. इस बदलाव का असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. तापमान बढ़ने से हवा के बहाव (विंड पैटर्न), वायुदाब और बारिश के वितरण में बड़ा बदलाव आ जाता है, जिससे कई देशों में मौसम असामान्य हो जाता है.

भारत के लिए अल नीनो खास तौर पर चिंता का विषय होता है, क्योंकि यह देश के सबसे महत्वपूर्ण मौसम चक्र यानी दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देता है. मानसून कमजोर होने का मतलब है कि बारिश कम होगी या सही समय पर नहीं होगी. इससे खेतों में पानी की कमी हो सकती है, जिससे फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं.

भारत में कमजोर और अनियमित मानसून की आशंका

APCC की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के मध्य तक भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम और असमान हो सकती है. इसका मतलब यह है कि कहीं ज्यादा बारिश होगी तो कहीं बिल्कुल कम, जिससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अल नीनो का असर बढ़ता है, तो मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे फसलों की पैदावार घटने का खतरा रहेगा.

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आने वाले महीनों में बढ़ेगा तापमान, अल नीनो से बिगड़ेगा बारिश का पैटर्न, pc-APEC Climate Center

पहले भी दिख चुका है असर

रिपोर्ट में 2023 के अल नीनो का उदाहरण दिया गया है, जो जून से शुरू होकर करीब 11 महीने तक चला था. उस दौरान खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट आई थी और खाद्य महंगाई भी बढ़ गई थी. इससे साफ है कि अल नीनो का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सीधे आम लोगों की जेब और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है.

किन क्षेत्रों में पड़ेगा ज्यादा असर

APCC के मुताबिक, भारत, बंगाल की खाड़ी, दक्षिणी हिंद महासागर और मैरीटाइम कंटिनेंट (इंडोनेशिया-फिलीपींस क्षेत्र) में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा, दुनिया के कई हिस्सों जैसे यूरोप, एशिया, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है. वहीं प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है.

अप्रैल से जून के बीच कैसा रहेगा मौसम

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच कई क्षेत्रों में बारिश का वितरण असमान रहेगा. कुछ जगहों पर ज्यादा बारिश होगी, जबकि भारत जैसे देशों में बारिश कम हो सकती है. इस दौरान तापमान भी सामान्य से अधिक रहेगा, जिससे गर्मी का असर और बढ़ सकता है.

कृषि और पानी पर पड़ सकता है असर

अल नीनो का सबसे ज्यादा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ता है. अगर बारिश कम होती है, तो फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है और उत्पादन घट सकता है. इसके साथ ही जलाशयों में पानी की कमी हो सकती है, जिससे पीने के पानी और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ेगा असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर अटलांटिक, भूमध्य सागर, एशिया, अमेरिका और अफ्रीका के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. वहीं कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम तापमान भी देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर दुनिया का अधिकांश हिस्सा गर्म रहेगा.

बारिश का बदला पैटर्न

APCC के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी, जैसे प्रशांत महासागर और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्से. लेकिन भारत, दक्षिण एशिया और कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश कम रहने की संभावना है. इससे सूखा और जल संकट जैसी स्थिति बन सकती है.

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