औसत से ज्यादा गर्मी के बीच अब अल नीनो का मंडरा रहा संकट.. मॉनसून हो सकता है प्रभावित

अल नीनो एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान  समय-समय पर बढ़ जाता है. इसके साथ हवा, दबाव और बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आता है. इसका असर आमतौर पर ला नीना के उल्टा होता है, जो भारत में अच्छे मॉनसून से जुड़ा माना जाता है.

Kisan India
नोएडा | Published: 17 Mar, 2026 | 10:30 PM

मार्च महीने में औसत से ज्यादा गर्मी पड़ने की भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भविष्यवाणी के बाद विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा अपडेट ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. WMO ने अपने लेटेस्ट अपडेट में कहा है कि इस साल के आखिर में अल नीनो आने की संभावना है. अगर ऐसा होता है, तो इससे मॉनसून पर भी असर पड़ेगा. ऐसे में औसत के मुकाबले कम बारिश होगी, जिससे खरीफ फसल को नुकसान पहुंच सकता है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभी कुछ भी पक्का कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन आम तौर पर अल नीनो के दौरान बारिश कम होती है.

WMO की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च से मई के बीच दुनियाभर में जमीन का तापमान  औसत से ज्यादा रह सकते हैं. खास बात यह है कि भारत में इसका असर अभी से दिख रहा है. क्योंकि मार्च महीने में ही औसत से ज्याद गर्मी पड़ रही है. ऐसे  में गेहूं की फसल पर असर पड़ रहा है. इसी तरह तापमान बढ़ता रहा, तो गेहूं के दाने सिकुड़ सकते हैं.

क्या है अल नीनो और कैसे करता है मौसम पर असर

दरअसल, अल नीनो एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान  समय-समय पर बढ़ जाता है. इसके साथ हवा, दबाव और बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आता है. इसका असर आमतौर पर ला नीना के उल्टा होता है, जो भारत में अच्छे मॉनसून से जुड़ा माना जाता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रमुख सेलेस्टे साउलो का कहना है कि आने वाले महीनों में हालात पर लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि सही फैसले लिए जा सकें. उन्होंने कहा है कि 2023-24 का अल नीनो अब तक के पांच सबसे ताकतवर एल नीनो में से एक था और 2024 में रिकॉर्ड वैश्विक तापमान बढ़ने में इसका बड़ा योगदान रहा.

WMO ने यह भी कहा है कि अल नीनो और ला नीना के सीजनल पूर्वानुमान से करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान को रोका जा सकता है और यह कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए बहुत जरूरी योजना बनाने में मददगार होता है. WMO के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मई से जुलाई के बीच अल नीनो आने की संभावना बढ़कर करीब 40 फीसदी तक हो सकती है.

31 मई तक देश के कई हिस्सों में रहेगी हीटवेव की स्थिति

बता दें कि मार्च की शुरुआत में ही भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा था कि 31 मई तक देश के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या बढ़ सकती है. मौसम विभाग का कहना था कि खासकर गेहूं और तिलहन उगाने वाले राज्यों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे फसल की पैदावार कम हो सकती है. ऐसे में पैदावार में गिरावट आने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.

पैदावार में आ सकती है गिरावट

खासकर उत्तर-पश्चिम भारत में मार्च का महीना कुछ ज्यादा ही गर्म रहेगा. इससे रबी फसल को नुकसान  पहुंच सकता है. दरअसल, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. जबकि खाने के तेल का सबसे बड़ा आयातक है. हालांकि, भारत 2026 की अच्छी फसल पर भरोसा कर रहा है, ताकि अतिरिक्त गेहूं का निर्यात किया जा सके और महंगे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात को कम किया जा सके. पर जानकारों का कहना है कि गेहूं पकने के समय ज्यादा गर्मी पड़ने से फसल की पैदावार घट सकती है और पूरी उत्पादन क्षमता, जो इस साल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की उम्मीद थी, कम हो सकती है.

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Published: 17 Mar, 2026 | 10:30 PM
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