गर्मी का गेहूं पर दिखने लगा असर, बैंगनी रंग की हो रही बालियां.. PAU ने किसानों को दी खास सलाह

पंजाब में गर्मियों के कारण गेहूं का रंग बैंगनी हो गया है, लेकिन PAU ने किसानों को आश्वस्त किया कि फसल सुरक्षित है. यह रंग किस्म की प्राकृतिक विशेषता है. KVK राउनी ने कहा कि बिना सलाह फंजीसाइड न छिड़कें. हल्की सिंचाई और IMD रिपोर्ट के अनुसार तापमान सामान्य से ऊपर है.

Kisan India
नोएडा | Published: 14 Mar, 2026 | 04:26 PM

Punjab News: पंजाब में बढ़ती गर्मियों के कारण गेहूं के किसानों में चिंता बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि उनके खेतों में गेहूं का रंग बैंगनी हो गया है और उन्हें डर है कि गर्मी की वजह से बीज पतले या सिकुड़ सकते हैं, जिससे पैदावार कम हो सकती है. हालांकि, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) ने किसानों को चिंता न करने की सलाह दी है. PAU के कुलपति डॉ. गोसाल ने किसानों को आश्वस्त किया कि इस साल तापमान बढ़ने के कारण ही गेहूं का रंग बदल रहा है, लेकिन चूंकि तापमान 35°C से अधिक नहीं हुआ है, इसलिए फसल सुरक्षित है.

डॉ. गोसाल ने द ट्रिब्यून से कहा है कि तापमान चार-पांच डिग्री सामान्य से अधिक था, लेकिन यह अभी भी सुरक्षित सीमा के भीतर है. असली चिंता तब होती है जब फरवरी या मार्च की शुरुआत में तापमान 35°C पार कर जाता है. डॉ. गोसाल ने कहा कि गेहूं का बैंगनी रंग  उगाई गई किस्म की प्राकृतिक विशेषता है. कुछ खेतों में ऐफिड (पत्ती चूसक कीट) के हमलों की खबरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि फसल अब नुकसान के जोखिम वाले चरण से गुजर चुकी है और ऐफिड कभी-कभी उस समय लाल कीट (Red Bug) के नियंत्रण में मदद भी कर सकते हैं.

न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहा

PAU के एक्सटेंशन एजुकेशन डायरेक्टर डॉ. मखन सिंह भुल्लर ने पहले ही किसानों को सलाह दी थी कि हल्की सिंचाई  करके फसल की छाया और तापमान को ठंडा किया जाए और गर्मी का तनाव कम किया जा सके. IMD की मासिक सलाह के अनुसार, फरवरी और मार्च में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों, जिनमें पंजाब भी शामिल है, में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहा, जबकि बारिश औसत से कम हुई.

क्या कहते हैं पटियाला के KVK राउनी के निदेशक

पटियाला के KVK राउनी के निदेशक हरदीप सिंह सबिखी ने पंजाब के गेहूं किसानों को सलाह दी है कि गेहूं के ग्लूम्स पर बैंगनी रंग दिखाई देने पर कोई फंजीसाइड न छिड़कें, क्योंकि यह कोई बीमारी नहीं है. उन्होंने बताया कि पंजाब में कई किसानों ने गेहूं में बैंगनी रंग देख चिंता जताई है. कुछ किसानों ने बिना वैज्ञानिकों से सलाह लिए फंजीसाइड भी छिड़क दिया है. PAU के वैज्ञानिकों ने पूरे राज्य में सर्वे किया है और पाया है कि यह सिर्फ गेहूं की प्राकृतिक विशेषता है, कोई बीमारी नहीं.

बढ़ती गर्मी से फसल को बचाने के लिए फसल की करें सिंचाई

वहीं, पिछले हफ्ते PAU ने किसानों को सलाह दी कि अपने खेतों में हल्की सिंचाई करें, ताकि फसल बढ़ती गर्मी सह सके और संभावित नुकसान कम हो. कृषि विशेषज्ञों का कहना था कि अगर अगले हफ्तों में भी हीटवेव जैसी गर्मी बनी रही, तो राज्य में गेहूं की पैदावार कम हो सकती है. वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने किसानों और अधिकारियों से सतर्क रहने और मौसम अपडेट्स पर नजर बनाए रखने की अपील की थी, क्योंकि आने वाले दिनों में तापमान ऊंचा रहने की उम्मीद थी. साथ ही किसानों को सलाह दी कि किसान 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट  (13:0:45) का घोल दो बार छिड़कें. यह घोल 4 किलो पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका छिड़काव बूट लीफ और फूल आने (एन्थेसिस) की अवस्था में, खासकर शाम के समय करना बेहतर रहता है.

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