कश्मीर घाटी में इस वर्ष असामान्य मौसम ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय को गहरा झटका दिया है. लंबे समय से शहद उत्पादन से जुड़े किसान और मधुमक्खी पालक इस सीजन को पिछले कई वर्षों के सबसे खराब मौसमों में से एक बता रहे हैं. कम तापमान, अनियमित वर्षा और फूलों के कम खिलने के कारण शहद उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
गांदरबल जिले के गंगू गांव के मधुमक्खी पालक आबिद अली हर साल की तरह अप्रैल के अंतिम सप्ताह में राजस्थान और पंजाब से अपने छत्तों के साथ कश्मीर लौटे थे. आमतौर पर घाटी में लौटने के बाद उन्हें भरपूर शहद उत्पादन की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार मौसम ने उनकी सारी गणनाएं बिगाड़ दीं.
अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन को आबिद अली ने बताया कि सामान्य वर्षों में वे लगभग 100 किलोग्राम शहद का उत्पादन कर लेते थे, लेकिन इस बार उत्पादन घटकर करीब 30 किलोग्राम तक सिमट गया है. उनका कहना है कि लगातार बारिश और तापमान में गिरावट के कारण मधुमक्खियां छत्तों से बाहर निकलकर पर्याप्त मात्रा में पराग और मकरंद नहीं जुटा सकीं.
मौसम की वजह से फूलों पर पड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, घाटी में शहद उत्पादन मुख्य रूप से बबूल (Acacia) सहित विभिन्न फूलदार पौधों पर निर्भर करता है. इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में फूलों का खिलना प्रभावित हुआ. इससे मधुमक्खियों को भोजन स्रोत कम मिले और शहद संग्रहण की प्रक्रिया बाधित हुई.
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू–कश्मीर में शहद उत्पादन लगातार बढ़ा था. सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीकों और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने वाली पहलों के कारण यह क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले शहद के लिए पहचान बना रहा था. हल्के रंग और बेहतर स्वाद वाला कश्मीरी शहद देश के विभिन्न बाजारों में अच्छी मांग रखता है. लेकिन इस वर्ष की परिस्थितियों ने इस प्रगति की रफ्तार धीमी कर दी है.
मधुमक्खी पालकों का कहना है कि उत्पादन घटने के बावजूद उनके खर्च कम नहीं हुए हैं. छत्तों के रखरखाव, परिवहन, दवाओं और श्रम पर होने वाला व्यय पहले की तरह जारी है. ऐसे में कम उत्पादन सीधे उनकी आय को प्रभावित कर रहा है. कई छोटे उत्पादकों के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट का कारण बन सकती है.
क्लाइमेट चेंज की वजह से बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता मधुमक्खी पालन क्षेत्र के लिए नई चुनौती बनकर उभर रही है. तापमान में अचानक उतार–चढ़ाव, असमय वर्षा और फूलों के खिलने के चक्र में बदलाव का सीधा असर मधुमक्खियों की गतिविधियों पर पड़ता है.
मधुमक्खी पालकों ने सरकार से सहायता और तकनीकी सहयोग की मांग की है ताकि बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच इस महत्वपूर्ण कृषि–आधारित व्यवसाय को सुरक्षित रखा जा सके. उनका कहना है कि यदि मौसम की ऐसी स्थिति लगातार बनी रही तो आने वाले वर्षों में शहद उत्पादन और ग्रामीण आजीविका दोनों प्रभावित हो सकते हैं.