सर्दियों के साथ सुपर अल नीनो आने का खतरा, मॉनसून को लेकर बढ़ी चिंता

अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने चेतावनी दी है कि एल नीनो सर्दियों तक सुपर एल नीनो में बदल सकता है. सकारात्मक IOD राहत दे सकता है, लेकिन भारतीय मानसून और कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका बनी हुई है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 13 Jun, 2026 | 01:13 PM

इस वक्त भारत की नजरें हर मौसम एजेंसी की तरफ हैं. कमजोर मॉनसून और अल नीनो की चिंताओं की बीच इस उम्मीद के साथ कि शायद किसी एजेंसी की खबर भारत के पक्ष में होगी. पिछले दिनों आईओडी को लेकर आई खबरों ने फिक्र घटाई थी, लेकिन अब अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के तहत काम करने वाली नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस वैश्विक मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस साल सक्रिय हो चुके अल नीनो का और मजबूत रूप अगली सर्दी तक दिख सकता है. तब तक यह सुपर अल नीनो का रूप ले सकता है.

क्या है सुपर अल नीनो

NWS के अनुसार, प्रशांत महासागर के जल का तापमान लगातार बढ़ रहा है और अल नीनो के बहुत मजबूत स्तर तक पहुंचने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है. इसी बहुत मजबूत’ स्तर को सुपर अल नीनो माना जा रहा है.

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के समुद्री सतह तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण विकसित होती है. इसका प्रभाव केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है. भारत सहित कई देशों में इसके कारण वर्षा में कमी, सूखे जैसी परिस्थितियां और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर देखने को मिलता है.

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि समुद्री सतह तापमान (SST) सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है तो इसे ‘बहुत मजबूत’ या ‘सुपर अल नीनो’ की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान अनुमानों के मुताबिक प्रशांत महासागर में गर्मी का यह क्रम पूरे साल जारी रह सकता है. ऐसे में साल के दूसरे हिस्से में सुपर अल नीनो बनने की आशंका बढ़ गई है.

अब भी उम्मीदों की किरण.. नाम है आईओडी

हालांकि विशेषज्ञों की उम्मीदें अब भी आईओडी से लगी हुई हैं. उनका मानना है कि भारतीय मॉनसून पर अंतिम प्रभाव केवल अल नीनो से तय नहीं होगा. इसके साथसाथ हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole-IOD) की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. जापानी मौसम एजेंसी के अनुसार हिंद महासागर फिलहाल तटस्थ अवस्था में है, लेकिन जुलाई के आसपास सकारात्मक आईओडी विकसित होने की संभावना है.

सकारात्मक आईओडी भारत के लिए राहत देने वाला कारक माना जाता है. इस स्थिति में हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से का पानी अपेक्षाकृत अधिक गर्म हो जाता है, जिससे भारत की ओर नमी का प्रवाह बढ़ सकता है. कई बार सकारात्मक आईओडी, एल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को आंशिक रूप से संतुलित करने में मदद करता है और मानसून को सहारा देता है.

भारत में कमजोर मॉनसून की है भविष्यवाणी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पिछले दिनों दक्षिणपश्चिम मॉनसून को लेकर अपने अनुमान में संशोधन किया था. यह संशोधन चिंता बढ़ाने वाला है. विभाग ने मॉनसून वर्षा का अनुमान दीर्घकालिक औसत (LPA) के 90 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना जताई है. यह सामान्य से कम वर्षा की ओर संकेत करता है. मॉनसून इस वर्ष केरल तट पर सामान्य तिथि से कुछ दिन देरी से पहुंचा था, जिसने पहले ही कृषि क्षेत्र की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुपर अल नीनो विकसित होता है और सकारात्मक आईओडी अपेक्षित स्तर तक मजबूत नहीं बन पाता, तो भारत के कई हिस्सों में वर्षा वितरण प्रभावित हो सकता है. इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. ऐसे में मौसम वैज्ञानिक आने वाले महीनों में प्रशांत और हिंद महासागर दोनों की गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.

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