उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार किसानों को यूरिया खरीदने के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया के तहत अंगूठा लगाना होता है. बलरामपुर जिले में बायोमेट्रिक लगाने के लिए किसानों को 100 ऊंची टंकी पर चढ़ना पड़ रहा है. इसके विरोध में किसानों ने हंगामा किया और अब वीडियो वायरल होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.
किसानों के हंंगामे के बाद मामले की जांच शुरू
बलरामपुर जिले के हर्रैया सतघरवा विकास खंड की कोहरोडा कोऑपरेटिव सोसाइटी में यूरिया खरीदने के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (पहचान की पुष्टि) पूरा करने के मकसद से किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों के लगभग 100 फीट ऊंचे पानी के टैंक पर चढ़ने का एक कथित वीडियो वायरल हुआ है. इसके बाद जांच शुरू की गई है. जिला मजिस्ट्रेट विपिन जैन ने कहा कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं. यह मामला भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र का है. ऐसी संभावना है कि खराब मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी के कारण यह व्यवस्था की गई थी.
खराब इंटरनेट बताई जा रही वजह
हंगामा करने वाले किसानों ने आरोप लगाया कि कर्मचारी हवा का आनंद लेने के लिए टैंक पर चढ़ते हैं. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह इलाका भारत-नेपाल सीमा के पास है और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी इसकी वजह हो सकती है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक लाभार्थियों को कथित तौर पर पानी के टैंक पर चढ़ने के लिए कहा गया, जहां कोऑपरेटिव का एक कर्मचारी बायोमेट्रिक डिवाइस के साथ बैठा था ताकि खाद देने से पहले अंगूठे के निशान की पुष्टि की जा सके. वायरल वीडियो में कथित तौर पर कर्मचारी को पानी के टैंक के ऊपर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करते हुए, कैश गिनते हुए और खाद वितरण की प्रक्रिया करते हुए दिखाया गया है.

पानी की टंकी पर बायोमेट्रिक प्रकृिया पूरी करता कर्मचारी (पहली तस्वीर). प्रधान राम निवास गौतम (दूसरी तस्वीर).
एक अन्य वीडियो में एक महिला को यूरिया पाने के लिए उस ढांचे पर चढ़ते और अपने दस्तावेज दिखाते हुए देखा जा सकता है, जबकि कई किसानों को कथित तौर पर अपनी जान जोखिम में डालकर टैंक पर चढ़ते और उतरते देखा जा सकता है. इस अजीब व्यवस्था ने किसानों में नाराजगी पैदा कर दी है.
किसानों का आरोप हवा का आनंद लेने के लिए टंकी पर जाते हैं कर्मचारी
किसान राम प्रकाश ने पीटीआई से बात करते हुए आरोप लगाया कि कर्मचारी हवा का आनंद लेने के लिए पानी के टैंक पर चढ़ते हैं और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए किसानों को ऊपर जाने के लिए मजबूर करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई गिर जाए, तो उसे गंभीर चोटें आ सकती हैं और उसकी जिंदगी बर्बाद हो सकती है. नवलगंज गांव के प्रधान राम निवास गौतम ने आरोप लगाया कि कोऑपरेटिव सेक्रेटरी लगातार 15 से 20 दिनों तक गायब रहते हैं, जिसके कारण लापरवाही होती है और किसानों को परेशानी होती है.