Maharashtra Urea Pant: देश में खेती के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है यूरिया खाद. किसान समय पर यूरिया मिलने की उम्मीद करते हैं, लेकिन कई बार उत्पादन और मांग के बीच अंतर के कारण सरकार को विदेशों से यूरिया आयात करना पड़ता है. इसी समस्या को कम करने और देश को उर्वरक के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए महाराष्ट्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में एक नया गैस आधारित यूरिया संयंत्र लगाने की तैयारी शुरू हो गई है.
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां गेल (इंडिया) लिमिटेड और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) ने मिलकर इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) किया है. इस संयंत्र से हर साल 12.7 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया जाएगा. इससे देश में यूरिया की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
विदर्भ में बनेगा गैस आधारित यूरिया प्लांट, पाइपलाइन से मिलेगी प्राकृतिक गैस
उर्वरक विभाग के अनुसार, प्रस्तावित यूरिया संयंत्र महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा. इसकी खास बात यह होगी कि यह गेल की मुंबई -नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के पास बनाया जाएगा. इससे संयंत्र को आसानी से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति मिल सकेगी. गैस आधारित यूरिया प्लांट में कोयले या अन्य पारंपरिक ईंधनों की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जाता है. इससे उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा बेहतर और आधुनिक होती है. गेल और आरसीएफ इस परियोजना को शुरुआती योजना बनाने से लेकर प्लांट तैयार होने और संचालन तक मिलकर आगे बढ़ाएंगी.
यूरिया उत्पादन बढ़ाने की कोशिश, आयात पर निर्भरता होगी कम
उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में यूरिया की मांग लगातार बनी हुई है. किसानों की जरूरत पूरी करने के लिए सरकार को कई बार विदेशों से यूरिया मंगाना पड़ता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में भारत का यूरिया उत्पादन 293.26 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि इससे पिछले वर्ष 2024-25 में उत्पादन 306.67 लाख टन था. वहीं घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पिछले वित्त वर्ष में भारत का यूरिया आयात 83 प्रतिशत बढ़कर 103.50 लाख टन तक पहुंच गया. ऐसे में महाराष्ट्र में बनने वाला यह नया संयंत्र घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
गेल और आरसीएफ की साझेदारी से मजबूत होगा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान
गेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता ने मीडिया से कहा कि यह परियोजना प्राकृतिक गैस के बेहतर इस्तेमाल और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य के अनुरूप है. उन्होंने बताया कि गेल की गैस सप्लाई क्षमता और आरसीएफ के उर्वरक उत्पादन अनुभव को मिलाकर एक मजबूत परियोजना तैयार की जाएगी. वहीं आरसीएफ के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एस. शिवकुमार ने कहा कि इस परियोजना से देश में बढ़ती उर्वरक मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
इसके साथ ही महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. इस समझौते पर गेल के कार्यकारी निदेशक (व्यवसाय विकास और स्टार्ट-अप) संजय अग्रवाल और आरसीएफ की कार्यकारी निदेशक (परियोजना, कॉरपोरेट और सहयोग) ज्योति पाटिल ने हस्ताक्षर किए.
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि देश में यूरिया का उत्पादन बढ़ेगा. जब घरेलू उत्पादन मजबूत होगा तो विदेशों से खाद खरीदने की जरूरत कम होगी. इससे सरकार को उर्वरक प्रबंधन में मदद मिलेगी और किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने में आसानी होगी. यह परियोजना सरकार की आत्मनिर्भर भारत सोच और हाल ही में मंजूर राष्ट्रीय निवेश नीति यूरिया-2026 (NIPU-2026) के तहत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. महाराष्ट्र में बनने वाला यह गैस आधारित यूरिया संयंत्र आने वाले वर्षों में देश की खाद सुरक्षा को मजबूत करने और किसानों की खेती को बेहतर सहारा देने वाला कदम साबित हो सकता है.