खाद की नहीं होगी किल्लत! सरकार ने आयात किए 25 लाख टन यूरिया और 7 लाख टन DAP

केंद्र सरकार ने अप्रैल-जून 2026-27 में 25.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी का आयात किया है. सरकार चीन पर निर्भरता घटाने के लिए नए देशों से उर्वरक खरीद रही है. सऊदी अरब, रूस, जर्मनी और तुर्कमेनिस्तान के साथ दीर्घकालिक समझौते किए गए हैं, ताकि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके.

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नोएडा | Updated On: 25 Jul, 2026 | 10:38 AM

Urea Import: देश में उर्वरकों की मांग पूरी करने के लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 25.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) का आयात किया है. लोकसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान देश में कुल 115.72 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन हुआ. इस उत्पादन में 71.55 लाख टन यूरिया और 9.84 लाख टन डीएपी शामिल हैं. मंत्री ने कहा कि 2025-26 वित्त वर्ष में देश में कुल 517.74 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन हुआ था.

केंद्र सरकार ने कहा कि 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में देश ने 25.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) का आयात किया, ताकि किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति  सुनिश्चित की जा सके. सरकार के अनुसार, पूरे 2025-26 वित्त वर्ष में 103.50 लाख टन यूरिया और 61.94 लाख टन डीएपी का आयात किया गया था. लिखित जवाब में मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए सरकार लगातार आयात के स्रोतों में विविधता ला रही है.

चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में हो रहा काम

उन्होंने बताया कि उर्वरकों की आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने भारतीय उर्वरक कंपनियों  और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के बीच दीर्घकालिक व्यावसायिक समझौते कराने में भी मदद की है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने बताया कि उर्वरक विभाग ने विदेशों में भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर कई देशों में उर्वरकों के नए स्रोत तलाशे हैं, ताकि किसी एक देश, खासकर चीन, पर निर्भरता कम हो सके.

उर्वरकों का निर्यात सीमित कर दिया

नड्डा ने कहा कि चीन ने भारत को स्पेशियलिटी उर्वरकों का निर्यात सीमित कर दिया है. इसकी भरपाई के लिए भारतीय कंपनियां अब बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, मोरक्को और अमेरिका जैसे देशों से वॉटर सॉल्युबल (पानी में घुलनशील) उर्वरकों की खरीद बढ़ा रही हैं. इससे चीन से कम आयात होने के बावजूद किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में आने वाली दिक्कतों से निपटने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कई देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए हैं.

26.50 लाख टन डीएपी और एनपीके उर्वरकों के आयात

उन्होंने कहा कि भारतीय उर्वरक कंपनियों ने सऊदी अरब की कंपनियों के साथ हर साल करीब 31 लाख टन डीएपी की आपूर्ति के लिए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट (LTA) किया है. इसके अलावा, रूस की कंपनियों के साथ इस साल करीब 26.50 लाख टन डीएपी और एनपीके उर्वरकों के आयात का समझौता किया गया है. वहीं, म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) की आपूर्ति के लिए भारतीय कंपनियों ने रूस, जर्मनी और तुर्कमेनिस्तान से इस वर्ष 4.80 लाख टन उर्वरक खरीदने के समझौते भी किए हैं. सरकार का कहना है कि इन समझौतों से देश में उर्वरकों की आपूर्ति सुचारु बनी रहेगी और किसानों को जरूरत के समय खाद की कमी नहीं होगी.

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Published: 25 Jul, 2026 | 10:33 AM

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