Assam Flood Update: बारिश थमने के बावजूद असम में बाढ़ का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा. कहीं खेतों में खड़ी फसल पानी में समा गई है तो कहीं परिवार अपने घर छोड़ राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. कई बच्चों की पढ़ाई रुक गई है, किसानों की महीनों की मेहनत बह गई और कई परिवार अपनों को खोने के गम से उबर नहीं पा रहे. राज्य में अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोग आज भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं. सरकार राहत पहुंचाने में जुटी है, लेकिन मौसम विभाग की नई चेतावनी ने लोगों की चिंता फिर बढ़ा दी है.
सात जिलों में बाढ़ का कहर, 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
असम में बाढ़ की स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है. राज्य के सात जिले अब भी जल आपदा से जूझ रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में तीन लोगों की मौत हुई है, जिसमें शिवसागर जिले में दो और गोलाघाट जिले में एक व्यक्ति की जान गई है. इसके साथ ही राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है.
शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिश्वनाथ और कामरूप (मेट्रो) जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इन जिलों के 21 राजस्व सर्किल और 551 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. करीब 3,00,031 लोग अभी भी इस प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता किसानों को लेकर है, क्योंकि 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है. खेतों में खड़ी धान और अन्य फसलें खराब होने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
शहरों में भी पानी का संकट, सामान्य जीवन हुआ प्रभावित
बाढ़ का असर केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है. कामरूप (मेट्रो) जिले में कई शहरी इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है. पदुमबारी, बोरागांव, एक्सेलकेयर अस्पताल क्षेत्र, लचित नगर, जू रोड, रुक्मिणीगांव, अनिल नगर, नवीन नगर, सतगांव, बेहरबाड़ी, हाटीगांव, वायरलेस और जोरबाट जैसे इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि शहरी जलभराव से बड़ी आबादी के प्रभावित होने की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन लगातार जमा पानी ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है. सड़कें डूबने से आवाजाही मुश्किल हो गई है और कई जगह व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं.
राहत अभियान तेज, प्रभावित परिवारों को मिल रही आर्थिक मदद
बाढ़ प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए असम सरकार ने राहत अभियान तेज कर दिया है. सरकार की ओर से खाद्य सामग्री, कपड़े और जरूरी सामान से भरे 30 ट्रकों को प्रभावित जिलों के लिए रवाना किया गया है. इन राहत सामग्रियों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बांटा जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, असम के मंत्री अतुल बोरा (Atul Bora) ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) के नेतृत्व में सरकार लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है.
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार को 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है. इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान भी उपलब्ध कराया जा रहा है. राहत कार्यों में असम गण परिषद के सांसद, विधायक, वरिष्ठ पदाधिकारी और असम पुलिस के जवान भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
अमित शाह ने लिया हालात का जायजा
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत की और राज्य के हालात की जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने बताया कि कई इलाकों में पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार अभी अपने घरों में वापस नहीं लौट पाए हैं. कई मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और उनमें कीचड़ व गाद भर गई है. अमित शाह ने मुख्यमंत्री को राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है.
IMD की चेतावनी से बढ़ी चिंता
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले तीन दिनों तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. ऐसे में बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं. प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है. असम के हजारों परिवार अब भी यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द पानी उतरे और वे अपनी उजड़ी हुई जिंदगी को फिर से पटरी पर ला सकें.