अल नीनो के असर से मॉनसून देरी से पहुंचा है और समय पर बारिश नहीं हो पाई है. इसके चलते खरीफ सीजन की बुवाई बेहद धीमी रही है और अगस्त में अल नीनो का असर बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है. अल नीनो के चलते कुछ हिस्सों में किसान सूखे की स्थति का सामना कर रहे हैं तो कुछ हिस्सों में बारिश ने तबाही मचा रखी है. कावेरी नदी में पानी की कम आवक से फसल सिंचाई सुविधाओं पर बुरा असर पड़ने की चिंता है. खेती-किसानों को संभावित नुकसान के खतरों का आकलन करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक्सपर्ट एडवाइजरी पैनल बनाया है.
एडवाइजरी पैनल सरकार को देगा रिपोर्ट
तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को एक एक्सपर्ट एडवाइजरी कमेटी बनाने का ऐलान किया है. यह कमेटी वैज्ञानिक आधार पर तेज अल नीनो के संभावित असर पर नजर रखेगी, उसका आकलन करेगी और जरूरी सावधानी व आपदा प्रबंधन के उपाय सुझाएगी. इस कमेटी में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, तटीय संसाधन प्रबंधन, शहरी बुनियादी ढांचे आदि क्षेत्रों में खास अनुभव रखने वाले एक्सपर्ट शामिल हैं.
कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
यह कदम एडिशनल चीफ सेक्रेटरी/कमिश्नर ऑफ रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से जारी उस अलर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया है कि 2026 में गंभीर अल नीनो घटना होने की बहुत ज्यादा संभावना है. सबसे ज्यादा कृषि उत्पादन पर असर पड़ने के साथ ही किसानों पर संकट गहराने की चिंता है. राज्य के कुछ हिस्से सूखा की स्थिति झेल रहे हैं तो कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश किसानों के लिए मुसीबत बनी है.
कावेरी में पानी की कम आवक से सिंचाई सुविधाओं पर असर
अल नीनो के असर से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जिससे कावेरी नदी में पानी की आवक और सिंचाई सुविधाओं पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, उत्तर-पूर्व मॉनसून के मौसम में भारी बारिश और बाढ़ जैसी चरम मौसम की घटनाओं की आशंका है. इसलिए, सरकार ने तमिलनाडु डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एजेंसी (TNDRRA) को सलाह देने के लिए एक एक्सपर्ट एडवाइजरी कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा, ताकि सरकार तेज अल नीनो से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी कदम उठा सके.