Sugar prices: देश में चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. चीनी की सप्लाई कम होने के कारण बाजार में इसके दाम मजबूत बने हुए हैं. कुछ समय पहले सरकार की ओर से डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय किए जाने के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी आई थी, लेकिन अब चीनी के भाव फिर बढ़ गए हैं. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नए चीनी सीजन की शुरुआत तक कीमतों में तेजी बनी रह सकती है. इसका असर सिर्फ चीनी बाजार पर ही नहीं, बल्कि एथेनॉल उत्पादन पर भी पड़ सकता है. अगर चीनी के दाम इसी तरह मजबूत रहते हैं तो चीनी मिलों के लिए गन्ने या चीनी को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने के बजाय सीधे चीनी बनाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. ऐसे में आने वाले एथेनॉल सप्लाई ईयर में एथेनॉल के लिए गन्ने और चीनी का डायवर्जन कम होने की संभावना जताई जा रही है.
दरअसल, चीनी और एथेनॉल दोनों के लिए गन्ने का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में मिलों के सामने यह सवाल रहता है कि उपलब्ध गन्ने से चीनी बनाई जाए या उसका इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में किया जाए. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में चीनी की कीमतें मजबूत हैं, जबकि एथेनॉल की कीमतों में लंबे समय से बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. इससे चीनी मिलों के लिए एथेनॉल उत्पादन की तुलना में चीनी बनाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने भी कहा है कि मौजूदा कीमतों को देखते हुए मिलें एथेनॉल के बजाय ज्यादा चीनी उत्पादन को प्राथमिकता दे सकती हैं.
चीनी के दाम बढ़ने से क्यों बदलेगा मिलों का फैसला?
एथेनॉल की कीमतों में लंबे समय से स्थिरता बनी हुई है. वहीं, 2022-23 में एथेनॉल की कीमतों में आखिरी बार बदलाव के बाद से गन्ने की कीमतों में करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में एथेनॉल बनाने की लागत बढ़ गई है, जबकि उसकी कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ी. विशेषज्ञों के अनुसार, इस वजह से मौजूदा समय में एथेनॉल उत्पादन आर्थिक रूप से कम फायदेमंद हो गया है. इसके अलावा इस साल चीनी का भंडार भी कम बताया जा रहा है, जिससे चीनी के दाम मजबूत रहने की संभावना है.
गन्ने के रस से एथेनॉल पर पड़ सकता है असर
उद्योग विशेषज्ञ के मुताबिक, अगर गन्ने, चीनी और एथेनॉल की मौजूदा कीमतें बनी रहती हैं तो उद्योग गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने से पीछे हट सकता है. ऐसी स्थिति में एथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से सी-हेवी शीरे से किया जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि चीनी उद्योग आम तौर पर हर साल 25 से 35 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट करता है. अगर यह डायवर्जन रुकता है तो बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है. इससे लंबे समय में चीनी की कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना भी बन सकती है.
उद्योग ने सरकार से कीमत बढ़ाने की मांग की
एथेनॉल उत्पादन को लेकर उद्योग संगठन सरकार से इसकी कीमत बढ़ाने की मांग कर रहा है. विजेंद्र सिंह ने कहा कि अतिरिक्त चीनी से एथेनॉल बनाने की व्यवस्था को लंबे समय तक जारी रखना जरूरी है. उनके मुताबिक, इस नीति से पहले ही गन्ना किसानों और चीनी उद्योग दोनों को फायदा हुआ है. उद्योग का मानना है कि एथेनॉल की कीमतों में उचित बदलाव होने से मिलों के लिए इसका उत्पादन आर्थिक रूप से बेहतर विकल्प बन सकता है.
ESY 2026-27 में घट सकता है डायवर्जन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूलब्रेन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक ने मौजूदा चीनी कीमतों के रुझान को देखते हुए ESY 2026-27 में एथेनॉल के लिए चीनी के कम डायवर्जन की संभावना जताई है. उनके मुताबिक, चीनी मिलें एथेनॉल की तुलना में चीनी उत्पादन को प्राथमिकता दे सकती हैं और खासतौर पर गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने से दूरी बना सकती हैं.