Wheat Production 2026: दुनियाभर में गेहूं की खेती को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, 2026-27 सीजन में वैश्विक गेहूं उत्पादन करीब 2.3 करोड़ टन (23 मिलियन टन) घट सकता है. इसकी बड़ी वजह अल नीनो का असर, मौसम की अनिश्चितता, उर्वरकों की बढ़ती कीमतें और कई देशों में किसानों का गेहूं छोड़कर दूसरी फसलों की ओर रुख करना माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल नीनो का असर अगले साल तक जारी रहा, तो 2027-28 में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. ऐसे में दुनिया भर में गेहूं की सप्लाई पर दबाव बढ़ने और कीमतों में तेजी आने की संभावना है.
अल नीनो और महंगे उर्वरकों ने बढ़ाई चिंता
इस बार अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े गेहूं उत्पादक देशों में कई किसानों ने गेहूं का रकबा घटा दिया है. इसकी सबसे बड़ी वजह खेती की बढ़ती लागत और मौसम को लेकर अनिश्चितता है. ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण उर्वरकों के कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. इससे खाद महंगी हुई और किसानों की लागत बढ़ गई. कई किसानों ने कम लागत वाली दूसरी फसलों की खेती को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया.
23 मिलियन टन घट सकता है वैश्विक उत्पादन
इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल (IGC) के अनुसार, 2026-27 सीजन में दुनिया का गेहूं उत्पादन घटकर 821 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि मौजूदा सीजन में यह 844 मिलियन टन रहने का अनुमान है. दूसरी ओर, गेहूं की खपत लगातार बढ़ रही है. अगले सीजन में वैश्विक खपत 828 मिलियन टन तक पहुंच सकती है, जो इस साल 822 मिलियन टन रहने का अनुमान है. यानी उत्पादन कम होगा और मांग ज्यादा रहेगी. यही वजह है कि दुनिया में गेहूं का अंतिम स्टॉक भी घटकर 279 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो इस समय लगभग 285 मिलियन टन है.
अमेरिका और कनाडा में घटा गेहूं का रकबा
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) का भी मानना है कि, इस बार अमेरिका और कनाडा में गेहूं का उत्पादन कम रहेगा. हालांकि रूस और यूक्रेन में कुछ बेहतर उत्पादन इसकी आंशिक भरपाई कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में गेहूं का रकबा लगभग 100 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. वहीं कनाडा में किसान रिकॉर्ड स्तर पर कैनोला की खेती कर रहे हैं और गेहूं का क्षेत्र घटा दिया गया है. इसके अलावा मक्का, सोयाबीन और जौ जैसी फसलों का रकबा भी कई देशों में बढ़ रहा है.
यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी मौसम बना परेशानी
यूरोप के कई देशों में लगातार गर्मी और सूखे ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है. फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, पोलैंड, ऑस्ट्रिया और हंगरी जैसे देशों में लंबे समय से सूखी मिट्टी और हीटवेव के कारण फसल की बढ़वार प्रभावित हुई है. यूरोप के अनाज व्यापार संगठन COCERAL के मुताबिक, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन का कुल अनाज उत्पादन इस साल घटकर 263.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 286.6 मिलियन टन था. वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी महंगे उर्वरकों और अल नीनो की आशंका के चलते गेहूं की बुआई पिछले सात वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.
रूस-यूक्रेन युद्ध का भी पड़ रहा असर
रूस और यूक्रेन दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातक देशों में शामिल हैं. लेकिन दोनों देशों के बीच जारी युद्ध अब भी वैश्विक अनाज व्यापार को प्रभावित कर रहा है. रिसर्च संस्था SovEcon के अनुसार, रूस का गेहूं निर्यात भी अगले सीजन में घट सकता है. काला सागर क्षेत्र में व्यापार प्रभावित होने और समुद्री मार्गों में बाधा आने से वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
गेहूं की कीमतों में आ सकती है तेजी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि उत्पादन घटने, मांग बढ़ने और वैश्विक सप्लाई पर दबाव के कारण आने वाले महीनों में गेहूं की कीमतों में नरमी की संभावना कम है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें पहले ही मजबूत बनी हुई हैं और अगर अल नीनो का असर लंबे समय तक जारी रहा, तो कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. ऐसे में दुनिया के कई देशों को खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने, किसानों को सहायता देने और सप्लाई चेन मजबूत करने की दिशा में अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.