बरसात का मौसम केवल खेतों के लिए नहीं, पशु-आहार की गुणवत्ता के लिए भी परीक्षा का समय होता है. कई पशुपालक अच्छी सामग्री खरीदते हैं, लेकिन गोदाम, कमरे या शेड में नमी लगने पर वही सामग्री गुठलीदार, बदबूदार या फफूंद-युक्त हो सकती है. रुद्रपुर सॉल्वेंट्स के डायरेक्टर अंकित बंसल ने किसान इंडिया को बताया कि डी-ऑयल्ड राइस ब्रान (DORB) सहित कई जैविक आहार सामग्री हवा और फर्श की नमी खींच सकती हैं. इसलिए खरीद के बाद का भंडारण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सामग्री का चुनाव.
नमी क्यों है सबसे बड़ा जोखिम?
नमी बढ़ने पर आहार सामग्री में गांठें बन सकती हैं, बासी या सीलन वाली गंध आने लगती है और फफूंद बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है. ढेर के बीच या नीचे रखे बोरे बाहर से सामान्य दिख सकते हैं, पर अंदर से गर्म या नम हो सकते हैं. यही कारण है कि केवल छत होना पर्याप्त नहीं है; फर्श, दीवार, हवा की आवाजाही और बोरे रखने का तरीका भी महत्वपूर्ण है.
सात सरल नियम
- 1. बोरों को सीधे फर्श पर न रखें: बोरों के नीचे लकड़ी या प्लास्टिक के पैलेट, तख्त या नमी रोकने वाला आधार रखें. फर्श से सीधी नमी सबसे पहले नीचे वाले बोरों को प्रभावित करती है.
- 2. दीवार से दूरी बनाए रखें: बोरों को दीवार से चिपकाकर न रखें. बरसात में दीवारों पर नमी या संघनन हो सकता है. थोड़ी खुली जगह रहने से हवा का प्रवाह और निरीक्षण दोनों आसान होते हैं.
- 3. ढेर के चारों ओर हवा चलने दें: बहुत सघन ढेर में भीतर की गर्मी और नमी बाहर नहीं निकलती. बोरों के बीच तथा गलियारे में पर्याप्त जगह रखें, ताकि हवा चल सके और प्रत्येक हिस्से तक पहुंच बन सके.
- 4. पुराने स्टॉक को पहले उपयोग करें: ‘पहले आया, पहले इस्तेमाल’ का नियम अपनाएं. हर खेप पर प्राप्ति की तारीख लिखें और पुराने बोरे आगे रखें। इससे सामग्री लंबे समय तक पड़ी नहीं रहती और खराबी समय पर दिखाई देती है.
- 5. बीच और नीचे वाले बोरों की भी जांच करें: बरसात में केवल ऊपर या बाहर के बोरे देखकर संतुष्ट न हों. ढेर के नीचे, बीच और दीवार की ओर वाले बोरों को समय-समय पर हाथ लगाकर देखें. असामान्य गर्मी, गांठें या भारीपन नमी का संकेत हो सकते हैं.
- 6. गंध, रंग और बहाव को नजरअंदाज न करें: ताजा और सही ढंग से रखी सामग्री सामान्यतः मुक्त रूप से बहती है और उसमें तेज सीलन या फफूंद जैसी गंध नहीं होती. यदि सामग्री चिपकी हुई, असमान रंग की, अत्यधिक धूल वाली या बदबूदार लगे, तो उसे अच्छे स्टॉक में मिलाने से पहले अलग रखें और विशेषज्ञ सलाह लें.
- 7. फटे या गीले बोरे अलग रखें: बारिश का पानी, रिसाव या फटा बोरा स्थानीय खराबी को पूरे ढेर तक पहुंचा सकता है। ऐसे बोरे तुरंत अलग करें, कारण खोजें और आसपास के बोरों की भी जांच करें.
खरीदते समय चार छोटे सवाल
किसी भी आहार सामग्री की खरीद पर केवल एक संख्या या केवल कीमत देखकर निर्णय न लें. पूछें: क्या यह खेप साफ, सूखी और समान दिखाई देती है? क्या बोरे आसानी से बहने वाली सामग्री से भरे हैं या गांठें बनी हैं? क्या बैच के लिए परीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध है? और क्या इसे घर या फार्म पर सूखी, हवादार जगह में रखा जा सकेगा? इन सवालों से खरीद और भंडारण दोनों की जिम्मेदारी स्पष्ट होती है.
बरसात के दिनों में सप्ताह में कम से कम एक बार तीन काम करें
पहले नीचे और भीतर के बोरों को देखें; फिर गोदाम की दीवार, छत और फर्श पर रिसाव या नमी जांचें; और अंत में पुराने स्टॉक की तारीख मिलाएं. यह छोटी जांच किसी महंगी मशीन के बिना भी की जा सकती है. यदि फार्म पर बड़ी मात्रा में सामग्री रखी जाती है, तो निरीक्षण की तारीख और देखी गई स्थिति एक नोटबुक में लिखना उपयोगी रहता है.
कब उपयोग रोककर सलाह लेनी चाहिए?
यदि सामग्री में स्पष्ट फफूंद, तेज सीलन या सड़ी हुई गंध, असामान्य गर्मी, चिपचिपाहट, पानी लगने के निशान या कीटों की गतिविधि दिखाई दे, तो उसे सामान्य स्टॉक के साथ मिलाना उचित नहीं है. ऐसी स्थिति में संदिग्ध सामग्री को अलग रखें और पशुचिकित्सक, पशु-पोषण विशेषज्ञ या विश्वसनीय गुणवत्ता-विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही आगे का निर्णय करें.
पशु के लिए अंतिम आहार कैसे तय करें?
हर पशु की उम्र, स्वास्थ्य, दूध उत्पादन, कार्यभार और उपलब्ध चारे की स्थिति अलग होती है. इसलिए किसी एक सामग्री को दूसरे की सीधी जगह पर लगाने या एक समान मात्रा सब पशुओं को देने का नियम सही नहीं है. अंतिम आहार अनुपात योग्य पशु-पोषण विशेषज्ञ या पशुचिकित्सक की सलाह से तय करना चाहिए.
बरसात में अच्छा भंडारण खर्च नहीं, नुकसान से बचाव है
बरसात में अच्छा भंडारण खर्च नहीं, नुकसान से बचाव है. पैलेट का उपयोग, दीवार से दूरी, हवा की आवाजाही, पुराने स्टॉक का पहले उपयोग और नियमित निरीक्षण – ये छोटी आदतें हैं, लेकिन इनके बिना अच्छी सामग्री भी उपयोग से पहले खराब हो सकती है. जागरूक पशुपालक केवल खरीद नहीं करता; वह सामग्री को सही स्थिति में संभालकर पशु-आहार की गुणवत्ता भी बचाता है.