Indigenous Cows: गांव की सुबह, खेतों की खुशबू और गोशाला में खड़ी देसी गायें..अब यही तस्वीर किसानों की आमदनी बदलने वाली है. केंद्र सरकार ने स्वदेशी गायों की नस्ल सुधार और A2 दूध को बढ़ावा देने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है. राज्यसभा में मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि नई तकनीक और योजनाओं से किसानों की कमाई तेजी से बढ़ रही है.
स्वदेशी गायों को बचाने और बढ़ाने पर सरकार का फोकस
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन ने राज्यसभा में कहा कि सरकार गिर, साहीवाल, राठी, थारपारकर, हरियाना, कंकरेज, ओंगोल, देओनी, नागौरी और रेड सिंधी जैसी देसी नस्लों को बचाने और बढ़ाने के लिए काम कर रही है. इसके लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन चलाया जा रहा है. इस योजना का मकसद है कि अच्छी नस्ल की गायें बढ़ें, ज्यादा दूध दें और किसानों को बेहतर दाम मिल सके. खास बात यह है कि इन गायों का A2 दूध बाजार में ज्यादा कीमत पर बिक रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है.
कृत्रिम गर्भाधान से बेहतर नस्ल तैयार
राज्यसभा में मंत्री राजीव रंजन सिंह कहा कि सरकार ने पूरे देश में कृत्रिम गर्भाधान (AI) को बढ़ावा दिया है. इससे अच्छे नस्ल के सांडों के जरिए गायों की नस्ल सुधारी जा रही है. अब तक देश में 15.29 करोड़ से ज्यादा कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं और 5.74 करोड़ किसान इसका लाभ ले चुके हैं. इससे दूध उत्पादन में भी तेजी आई है और पशुपालन अब ज्यादा फायदेमंद बन रहा है.
स्पर्म से बढ़ेंगी दूध देने वाली गायें
इसका साथ ही उन्होंने कहा की नई तकनीक के तहत स्पर्म (Sex Sorted Semen) का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे लगभग 90 फीसदी तक मादा बछड़े पैदा होते हैं. इसका फायदा यह है कि ज्यादा गायें दूध देंगी और आवारा पशुओं की समस्या भी कम होगी. पहले यह तकनीक महंगी थी, लेकिन अब इसकी कीमत 800 रुपये से घटाकर करीब 250 रुपये कर दी गई है. साथ ही सरकार किसानों को 50 फीसदी तक सब्सिडी भी दे रही है.
IVF तकनीक से तेजी से होगा नस्ल सुधार
अब पशुपालन में IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक (IVF Technology) का भी इस्तेमाल हो रहा है. इससे अच्छी नस्ल के भ्रूण तैयार कर गायों में डाले जाते हैं. देश में 24 IVF लैब बनाई गई हैं. इनसे हजारों बछड़े पैदा हो चुके हैं. सरकार किसानों को इस तकनीक के लिए 5000 रुपये तक की मदद भी दे रही है. इससे किसान जल्दी अच्छी नस्ल के पशु तैयार कर पा रहे हैं.

नई तकनीक से बढ़ा दूध उत्पादन, किसानों की आय मजबूत.
डिजिटल पहचान और डेटा से आसान निगरानी
सरकार ने भारत पशुधन नाम का डिजिटल डेटाबेस बनाया है. इसमें हर पशु को 12 अंकों का यूनिक ID दिया गया है. इससे किसान और सरकार दोनों को पशु की नस्ल, दूध उत्पादन और स्वास्थ्य की जानकारी आसानी से मिलती है. साथ ही जीनोमिक चिप के जरिए यह भी पता लगाया जाता है कि पशु की नस्ल कितनी शुद्ध है.
दूध उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
इसके साथ ही राजीव रंजन ने कहा कि सरकारी योजनाओं का असर साफ दिख रहा है. देश में दूध उत्पादन 2014-15 में 146.3 मिलियन मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2024-25 में 247.87 मिलियन मीट्रिक टन हो गया है. वहीं, प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 319 ग्राम से बढ़कर 485 ग्राम प्रति दिन हो गई है. यह दिखाता है कि भारत दूध उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है.