देश में चावल की बंपर खरीद, 5 करोड़ टन के करीब पहुंचा आंकड़ा… कई राज्यों में रिकॉर्ड उछाल

सरकार के पास अब चावल का बड़ा भंडार मौजूद है. ऐसे में इसे सही तरीके से उपयोग करना भी एक बड़ी चुनौती है. सरकार इस अतिरिक्त स्टॉक को एथेनॉल उत्पादन, राज्यों को आपूर्ति और खुले बाजार में बिक्री के जरिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के दौरान अब तक करीब 10.8 मिलियन टन चावल बेचा जा चुका है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 5 May, 2026 | 09:14 AM

Rice procurement: देश में इस साल चावल की सरकारी खरीद ने नया रिकॉर्ड बना दिया है. बढ़ते उत्पादन और सक्रिय खरीद नीति के चलते सरकार के भंडार तेजी से भरते जा रहे हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच चावल की कुल खरीद करीब 5 करोड़ टन तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक है.

यह बढ़ोतरी इस बात का इशारा करती है कि देश में धान उत्पादन बेहतर रहा है और सरकार ने भी किसानों से खरीद में तेजी दिखाई है. इस बार सर्दियों की फसल का भी बड़ा योगदान रहा है, जिसमें करीब 1.21 मिलियन टन चावल की खरीद शामिल है.

खरीद में बढ़ोतरी के पीछे कारण

इस साल चावल की खरीद बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं. एक तरफ मौसम ने उत्पादन को समर्थन दिया, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अधिक खरीद कर किसानों को राहत दी. सरकार की नीति रही है कि किसानों की उपज का उचित दाम मिले और खाद्यान्न भंडार भी मजबूत बना रहे. यही कारण है कि इस बार कई राज्यों में खरीद के आंकड़े पिछले साल से बेहतर रहे हैं.

राज्यों में खरीद का हाल

अगर राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में खरीद में अच्छा उछाल देखने को मिला है. उत्तर प्रदेश, जो देश का बड़ा धान उत्पादक राज्य है, वहां चावल की खरीद 4.18 मिलियन टन तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत ज्यादा है.

मध्य प्रदेश में भी शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यहां खरीद में 18.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल 3.47 मिलियन टन चावल खरीदा गया.

उत्तराखंड में भी खरीद 11.3 प्रतिशत बढ़कर 5.02 लाख टन तक पहुंच गई. छत्तीसगढ़ में 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 7.3 मिलियन टन चावल खरीदा गया. हालांकि बिहार में इस बार थोड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां खरीद 4.8 प्रतिशत कम रही.

पंजाब-हरियाणा में गिरावट, दक्षिण भारत में तेजी

जहां कुछ राज्यों में खरीद बढ़ी, वहीं पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक धान उत्पादक राज्यों में इस बार कमी दर्ज की गई है. वहीं पंजाब में खरीद 9.7 प्रतिशत घटकर 10.49 मिलियन टन रह गई. हरियाणा में भी पिछले साल की तुलना में थोड़ी कमी आई है.

इसके विपरीत दक्षिण भारत के राज्यों में शानदार बढ़ोतरी देखी गई है. आंध्र प्रदेश में खरीद में 71.7 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि तेलंगाना में यह 15.4 प्रतिशत बढ़ी. ओडिशा ने भी 31.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.27 मिलियन टन चावल की खरीद की, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

बढ़ते स्टॉक का कैसे होगा उपयोग

सरकार के पास अब चावल का बड़ा भंडार मौजूद है. ऐसे में इसे सही तरीके से उपयोग करना भी एक बड़ी चुनौती है. सरकार इस अतिरिक्त स्टॉक को एथेनॉल उत्पादन, राज्यों को आपूर्ति और खुले बाजार में बिक्री के जरिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के दौरान अब तक करीब 10.8 मिलियन टन चावल बेचा जा चुका है. इसमें से 5.2 मिलियन टन चावल एथेनॉल बनाने के लिए डिस्टिलरी को दिया गया है. यह कदम ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ अतिरिक्त भंडार को कम करने में भी मदद करेगा.

उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर

कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, खरीफ सीजन 2025-26 में चावल का उत्पादन 123.93 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो अब तक का एक रिकॉर्ड स्तर है. इससे साफ है कि आने वाले समय में भी चावल का भंडार और बढ़ सकता है, जिससे सरकार को स्टॉक मैनेजमेंट की रणनीति और मजबूत करनी होगी.

योजना और लक्ष्य

सरकार रबी सीजन के लिए भी खरीद का लक्ष्य तय कर चुकी है. करीब 7.96 मिलियन टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है. इससे यह भी साफ होता है कि आने वाले महीनों में भी चावल की खरीद और भंडारण का स्तर ऊंचा बना रह सकता है.

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