ईरान युद्ध के बीच चमका भारत का मक्का, निर्यात में तेजी से किसानों की बढ़ेगी कमाई

Maize export India growth: ईरान युद्ध के बाद वैश्विक बाजार में बदलाव आया है, जिससे एशियाई देशों की भारत के मक्का में दिलचस्पी और बढ़ गई है. ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं और कारोबार के बड़े अवसर सामने आ रहे हैं.

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नई दिल्ली | Published: 19 Mar, 2026 | 12:02 PM

Maize export India growth: देश की खेती और किसानों के लिए इस साल एक बड़ी अच्छी खबर सामने आ रही है. भारत से मक्का (कॉर्न) का निर्यात तेजी से बढ़ने की संभावना है. विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा मार्केटिंग ईयर (सितंबर तक) में भारत करीब 6.5 लाख टन मक्का निर्यात कर सकता है.

यह बढ़ोतरी सिर्फ एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों के मिलेजुले असर से हो रही है जैसे वैश्विक बाजार में बदलते हालात, ईरान युद्ध का असर, सस्ती कीमतें और देश में बढ़ता उत्पादन.

कैसे बदले हालात, और क्यों बढ़ी मांग?

हाल ही में मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया के व्यापार और ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है. इसका असर अनाज बाजार पर भी पड़ा है. कई देशों को अब नए सप्लायर की जरूरत पड़ रही है, और भारत इस मौके का फायदा उठा रहा है.

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट “Grains: World Markets and Trade” के अनुसार, पहले भारत के मक्का निर्यात का अनुमान 3.5 लाख टन था, जिसे अब बढ़ाकर 6.5 लाख टन कर दिया गया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच भारत ने करीब 4 लाख टन मक्का निर्यात किया, जो पिछले दो सालों की तुलना में लगभग दोगुना है.

सस्ती कीमतें बनी सबसे बड़ी ताकत

भारतीय मक्का की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रतिस्पर्धी कीमत है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत का मक्का सस्ता मिल रहा है, जिससे इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. उदाहरण के तौर पर, बांग्लादेश को भारतीय मक्का करीब 220-230 डॉलर प्रति टन में मिल रहा है, जबकि ब्राजील का मक्का लगभग 260 डॉलर प्रति टन पड़ता है. यही वजह है कि पड़ोसी देश भारतीय मक्का को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

उत्पादन में शानदार बढ़ोतरी

इस साल भारत में मक्का उत्पादन भी शानदार रहा है. USDA के अनुसार, देश में उत्पादन करीब 43 मिलियन टन (MT) तक पहुंच सकता है, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है.

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हालांकि जायद में बोआई का क्षेत्र थोड़ा घटकर 2.96 लाख हेक्टेयर रह गया है, लेकिन कुल उत्पादन पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा है.

एथेनॉल नीति ने बदला खेल

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, भारत में अब एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. पहले जहां गन्ने पर ज्यादा निर्भरता थी, अब अनाज आधारित इथेनॉल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.

2024-25 में करीब 46 फीसदी एथेनॉल उत्पादन मक्का से हुआ. हालांकि 2025-26 में चावल के उपयोग पर लगी रोक हटने के बाद कुछ बदलाव देखने को मिला है, लेकिन फिर भी मक्का की मांग मजबूत बनी हुई है.

नए बाजार, नई संभावनाएं

पहले भारत का मक्का निर्यात ज्यादातर बांग्लादेश तक ही सीमित था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. एशिया के कई नए देशों से भी मांग बढ़ने लगी है. खासकर वियतनाम से लगातार पूछताछ हो रही है और श्रीलंका (कोलंबो) से भी ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं. ईरान युद्ध के बाद वैश्विक बाजार में बदलाव आया है, जिससे एशियाई देशों की भारत के मक्का में दिलचस्पी और बढ़ गई है. ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं और कारोबार के बड़े अवसर सामने आ रहे हैं.

बिहार और दक्षिण भारत की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की मक्का फसल इस पूरे खेल में अहम भूमिका निभाएगी. बिहार हर साल करीब 2.2 से 2.5 मिलियन टन मक्का उत्पादन करता है. वहीं तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी अच्छी पैदावार और पुराने स्टॉक की उपलब्धता से सप्लाई मजबूत बनी हुई है.

कीमतों में उतार-चढ़ाव भी दिखा

साल की शुरुआत में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में ज्यादा नमी वाले मक्का की कीमत 12,000-13,000 रुपये प्रति टन तक थी, लेकिन खरीदार कम थे. जैसे ही अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ी, कीमतों में सुधार देखने को मिला और बाजार में तेजी आ गई.

किसानों के लिए क्या है मतलब?

इस पूरे बदलाव का सीधा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है. मक्का की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण किसानों को अपनी फसल के बेहतर दाम मिल सकते हैं. साथ ही अब उनकी उपज सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनेगी. इससे किसानों की आय ज्यादा स्थिर और मजबूत हो सकती है. अगर यही रुझान आगे भी जारी रहा, तो मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए यह साल काफी लाभदायक साबित हो सकता है.

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