मक्का की इस किस्म से प्रति एकड़ मिलेगा 220-222 क्विंटल चारा! पाशुपालकों को सालभर नहीं होगी चारे की कमी

Makka Ki Kheti: भारत में मक्का की खेती को ज्यादा मुनाफेदार बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने 50 से अधिक नई उन्नत किस्में विकसित की हैं. ये किस्में ज्यादा उत्पादन देने के साथ कीट और बीमारियों के प्रति भी सहनशील हैं. वहीं, IMH 229 जैसी साइलेज किस्म से प्रति एकड़ 220-222 क्विंटल तक हरा चारा मिल सकता है, जो डेयरी किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है. जानिए मक्का की इन नई तकनीकों और किस्मों से कैसे बढ़ेगी किसानों की आय.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Mar, 2026 | 06:25 PM

Makka Ki Kheti: देश में मक्का की खेती को ज्यादा फायदेमंद और टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक लगातार नई पहल कर रहे हैं. भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR) ने इस साल 50 से अधिक नई और उन्नत मक्का किस्में विकसित की हैं. इन किस्मों की खासियत यह है कि ये न केवल अधिक उत्पादन देती हैं, बल्कि कीट और बीमारियों के प्रति भी ज्यादा सहनशील हैं. इससे किसानों को अच्छी पैदावार और बेहतर आय मिलने की उम्मीद है.

उन्नत मक्का किस्मों का फायदा

ICAR-IIMR के वैज्ञानिक मनीष ककरलिया ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि ये नई मक्का किस्मों की क्वालिटी बेहतर होने के साथ-साथ प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं. यह किसानों के लिए कृषि जोखिम कम करने का एक बड़ा अवसर है. इन किस्मों से प्रति एकड़ उच्च उत्पादन के साथ-साथ फसल की व्यावसायिक गुणवत्ता भी बढ़ती है.

मक्का साइलेज: पशुपालन के लिए वरदान

वैज्ञानिक मनीष ककरलिया बताते हैं कि, मक्का का इस्तेमाल सिर्फ अनाज के तौर पर ही नहीं किया जाता, बल्कि इसे पशुओं के चारे (साइलेज) के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. साइलेज बनाने से पशुओं को सालभर संतुलित और पोषक आहार मिलता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन को बेहतर बनाते हैं.

विशेषकर डेयरी किसानों के लिए साइलेज मक्का हाई क्वालिटी वाला हरा चारा प्रदान करता है. साइलेज किस्म आईएमएच 229 से प्रति एकड़ लगभग 220-222 क्विंटल हरा चारा तैयार किया जा सकता है.

साइलेज किस्म आईएमएच 229 के फायदे

  • प्रति एकड़ 220-222 क्विंटल हरा चारा उत्पादन संभव.
  • 5-6 प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी.
  • आधुनिक मशीनों और तकनीकों के उपयोग से सही तरीके से तैयार और लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है.
  • किसानों को साइलेज बनाने और स्टोर करने का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है.

सही तरीके से तैयार किया गया साइलेज न केवल पशुओं के लिए हाई क्वालिटी वाला चारा होता है, बल्कि इसे जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक स्टोर कर इस्तेमाल किया जा सकता है.

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ICAR-IIMR के वैज्ञानिक मनीष ककरलिया ने बताए IMH 229 के फायदे

किसानों के लिए अवसर और लाभ

इन नई मक्का किस्मों और साइलेज उत्पादन तकनीकों से किसानों की आय में सुधार होगा. यह न सिर्फ खाद्य और पशुपालन उद्योग को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय बाजार में साइलेज की मांग को भी पूरा करने में मदद करेगा.

उन्नत मक्का किस्में और साइलेज तकनीकें, किसानों को आधुनिक खेती और पशुपालन के लिए सक्षम बनाती हैं. यह पहल देश में मक्का और डेयरी उद्योग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है.

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Published: 18 Mar, 2026 | 06:25 PM
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