Haryana Paddy Scam: हरियाणा में धान घोटाले से संबंधित मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है. अब करनाल पुलिस ने तारावड़ी और इंद्री अनाज मंडियों में धान घोटाले के मामले में दो एफआईआर के तहत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें कुछ सरकारी अधिकारी और राइस मिलर भी शामिल हैं. कहा जा रहा है कि जांच में अधिकारियों और मिलरों के बीच मिलीभगत सामने आई है, जहां खरीद के रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर राज्य को नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस ने कहा है कि दो विशेष जांच टीमों (SIT) ने 4- 5 महीने तक रिकॉर्ड, बयान और सबूतों की जांच के बाद यह चार्जशीट तैयार की है. आरोपियों पर साठगांठ, फर्जीवाड़ा और गलत जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं.
यह घोटाला पिछले खरीद सीजन में सामने आया, जब जांच में पता चला कि मंडियों में असल में धान पहुंचे बिना ही कागजों में खरीद दिखा दी गई और किसानों के खातों में भुगतान भी जारी कर दिया गया. इस मामले में अब तक 6 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और करीब 40 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं या जांच में शामिल हो चुके हैं. इनमें मार्केट कमेटी के सचिव, पूर्व DFSC, खरीद एजेंसियों के कर्मचारी, HSAMB के कर्मचारी, आढ़ती और राइस मिलर शामिल हैं.
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
डीएसपी राजीव कुमार ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि इंद्री और तारावड़ी अनाज मंडियों से जुड़े दो मामलों में 12 अधिकारियों, कर्मचारियों और राइस मिलरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. बाकी आरोपियों के खिलाफ भी चालान तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, जांच में साफ तौर पर सामने आया है कि सरकारी अधिकारी, खरीद एजेंसियों के कर्मचारी, राइस मिलर और अन्य लोग मिलकर एक संगठित तरीके से काम कर रहे थे. उन्होंने मिलकर खरीद के रिकॉर्ड में हेरफेर की, आंकड़े बढ़ाकर दिखाए और स्टॉक को इधर-उधर किया. एसपी नरेंद्र बिजारणिया ने कहा कि सभी छह एफआईआर की जांच अलग-अलग एसआईटी टीमों द्वारा की जा रही है और इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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क्या बोले किसान नेता
एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने कहा कि हरियाणा में धान घोटाला कोई नई बात नहीं है. उनके मुताबिक, आढ़ती, मंडी अधिकारी और खरीद एजेंसियां मिलकर कई सालों से इस तरह की गड़बड़ियां कर रहे थे, लेकिन इस साल बड़े स्तर पर मामले सामने आए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी किसानों के नाम पर नकली गेट पास और रसीदें बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया जाता था. हालांकि, इस बार सरकार की आंख खुली है. उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई सही दिशा में जा रही है. आरोपियों को कोर्ट से सजा जरूर मिलनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए और निजी कंपनियों को भी धान खरीद में शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए, ताकि किसानों को एमएसपी से बेहतर दाम मिल सकें.