Wheat Purchase: पंजाब में इस साल कई जिलों में गेहूं की खरीद तय लक्ष्य से ज्यादा हो गई है. ऐसे में 2,306 खरीद केंद्र बंद कर दिए गए हैं. अब पूरे राज्य में सिर्फ 577 गेहूं खरीद केंद्र ही चालू हैं, जिनमें 564 नियमित मंडियां और 13 अस्थायी मार्केट यार्ड शामिल हैं. आंकड़ों के मुताबिक, मंडियों में गेहूं की आवक अब काफी धीमी हो गई है. अब तक कुल 121.65 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंच चुका है, जबकि 120.89 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है. फिलहाल रोजाना आवक घटकर करीब 72,185 मीट्रिक टन रह गई है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस साल गेहूं खरीद का लक्ष्य 122 लाख मीट्रिक टन तय किया था, लेकिन मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में मौसम खराब होने से पहले ही फरवरी की असामान्य गर्मी और बारिश के कारण गेहूं के दाने छोटे रह गए. इससे उत्पादन घटने का अनुमान लगाया गया था और माना जा रहा था कि खरीद लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा. हालांकि, बाद में गेहूं की आवक और खरीद पिछले साल के बराबर पहुंच गई, जिससे भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने संदेह जताया और कथित फर्जी बिलिंग को लेकर चिंता व्यक्त की है.
120.89 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद
अब सबसे बड़ी चिंता खरीदे गए गेहूं की धीमी उठान को लेकर है. कुल 120.89 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद में से अब तक सिर्फ 74.77 लाख मीट्रिक टन ही उठाया जा सका है. खरीद सीजन से पहले राज्य सरकार ने केंद्र से 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं सीधे उठाने की मांग की थी, क्योंकि पिछले साल का स्टॉक पहले से ही गोदामों में भरा हुआ था. लेकिन अब तक मंडियों से सिर्फ 3.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही सीधे उठाया जा सका है, जिससे भंडारण और सप्लाई को लेकर दबाव बना हुआ है.
7.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं दूसरे राज्यों में भेजा गया
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पिछले साल इसी अवधि में पंजाब से 7.50 लाख मीट्रिक टन गेहूं दूसरे राज्यों में भेजा गया था. उस समय रोजाना 20- 25 ट्रेनें अनाज ढो रही थीं, जबकि इस बार सिर्फ 5- 6 ट्रेनें ही चल रही हैं. इसी वजह से राज्य सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मंडियों से गेहूं की उठान तेज करने की मांग की है.
बारिश से फसल को पहुंच सकता है नुकसान
वहीं, बीते रविवार को हुई बारिश से खरीद केंद्र पर गेहूं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है. क्योंकि पहले ही मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसल को काफी नुकसान हुआ था, जिसके चलते केंद्र ने खरीद नियमों में कुछ छूट दी थी. अब छह हफ्तों के भीतर दोबारा बारिश होने से फसल को दोहरा झटका लगा है. जालंधर, अमृतसर, तरनतारन, रूपनगर, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली, लुधियाना, फिरोजपुर और मोगा जैसे जिलों में 30 मिमी तक बारिश हुई, जिससे मंडियों में पानी भर गया. अब तक करीब 121.65 लाख टन गेहूं मंडियों में पहुंच चुका है, जिसमें से लाखों टन अभी उठान का इंतजार कर रहा है. राज्य में गेहूं खरीद 1 अप्रैल से शुरू हुई थी, जब 1,872 मंडियां खोली गई थीं और इस सीजन में 122 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा गया था.