Mustard farming: रबी सीजन में सरसों की खेती किसानों के लिए हमेशा से एक भरोसेमंद विकल्प रही है. लेकिन बदलते मौसम, बढ़ती लागत और पानी की कमी के कारण अब किसान ऐसी किस्मों की तलाश में हैं, जो कम संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन दे सकें. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरसों की आरएच 749 किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार देने के साथ-साथ बेहतर तेल प्रतिशत के लिए जानी जाती है.
सरसों की आरएच 749 किस्म क्यों है खास
आरएच 749 सरसों की एक उन्नत किस्म है, जिसे व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छी तरह विकसित हो जाती है. जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां यह किस्म किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है. इसके अलावा यह किस्म ठंड और पाले को भी सहन करने की क्षमता रखती है, जिससे रबी सीजन में फसल को नुकसान का खतरा कम हो जाता है.
इस किस्म में तेल की मात्रा लगभग 39 प्रतिशत तक पाई जाती है, जिससे बाजार में इसके दानों की मांग बनी रहती है. रोगों के प्रति भी यह किस्म अन्य पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक सहनशील मानी जाती है.
मिट्टी और बुवाई का सही तरीका
आरएच 749 किस्म की सरसों के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जहां पानी का निकास ठीक हो. बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए और उसमें अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाना फायदेमंद रहता है.
इस किस्म की बुवाई सितंबर से जनवरी के बीच की जा सकती है. बीज की मात्रा भी कम लगती है. प्रति हेक्टेयर करीब 4 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. बेहतर परिणाम के लिए बीजों को बुवाई से पहले उपचारित करना और सीड ड्रिल मशीन से कतारों में बुवाई करना अच्छा रहता है.
फसल अवधि और सिंचाई
आरएच 749 किस्म लगभग 135 से 145 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इसे ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती. सामान्य तौर पर दो से तीन सिंचाई में फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है. यही वजह है कि यह किस्म कम लागत में खेती करने वाले किसानों के लिए फायदेमंद मानी जाती है.
उपज और कमाई का गणित
सरसों की आरएच 749 किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 24 से 28 क्विंटल तक उपज मिल सकती है. मौजूदा बाजार भाव के अनुसार सरसों करीब 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है. इस हिसाब से किसान एक हेक्टेयर में इसकी खेती करके डेढ़ लाख रुपये के आसपास की कमाई कर सकते हैं.
किसानों के लिए सही चुनाव
कम लागत, कम पानी की जरूरत, ठंड सहनशीलता और अच्छी पैदावार—इन सभी खूबियों के कारण सरसों की आरएच 749 किस्म किसानों के लिए एक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बन रही है. जो किसान रबी सीजन में जोखिम कम करते हुए मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह किस्म सरसों की खेती में एक बेहतर चुनाव साबित हो सकती है.