Indian customs walnut seizure: भारतीय कस्टम विभाग ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 46 कंटेनरों में भरे अखरोट जब्त किए हैं. जांच में सामने आया कि यह माल असल में चीन से आया था, लेकिन कागजों में उसे अफगानिस्तान का बताया गया था. इन कंटेनरों को एक विदेशी जहाज से उतारा गया, जो कोमोरोस झंडे के तहत चल रहा था. जहाज बंदरगाह छोड़ चुका है, लेकिन माल को कस्टम ने रोक लिया है.
अधिकारियों को शक तब हुआ जब दस्तावेजों और माल की जांच में कई गड़बड़ियां मिलीं. बाद में विस्तृत जांच में साफ हुआ कि कुछ व्यापारियों ने शून्य आयात शुल्क का फायदा लेने के लिए गलत घोषणा की थी.
शून्य ड्यूटी का फायदा उठाने की कोशिश
भारत में अखरोट पर सामान्य रूप से 100 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगती है. यह ड्यूटी खास तौर पर घरेलू उत्पादकों, खासकर कश्मीर के अखरोट किसानों की सुरक्षा के लिए रखी गई है. लेकिन दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) के तहत अफगानिस्तान से आने वाले कुछ उत्पादों पर शून्य ड्यूटी का प्रावधान है. इसी नियम का फायदा उठाने के लिए कथित तौर पर कुछ व्यापारियों ने चीनी अखरोट को अफगान बताकर आयात किया. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरी तरह से “मिस-डिक्लेरेशन” यानी गलत घोषणा का मामला है.
व्यापारी सामने आने से बच रहे
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, जब कंटेनरों की सूची के आधार पर व्यापारियों से संपर्क किया गया, तो ज्यादातर ने माल से पल्ला झाड़ लिया. कुछ ने कहा कि यह माल उनका नहीं है, जबकि कुछ ने अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश की. अब अगर कोई आयातक इन कंटेनरों का दावा करता है, तो उसे 100 प्रतिशत ड्यूटी चुकानी होगी. इसके अलावा गलत घोषणा के आरोप में कानूनी कार्रवाई भी झेलनी पड़ेगी. ऐसे में संभावना कम है कि कोई खुलकर सामने आए.
राजस्व खुफिया विभाग की भूमिका
इस पूरे मामले में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की अहम भूमिका रही. जानकारी मिलने के बाद कस्टम ने जहाज को रोककर कंटेनरों की गहन जांच की. सूत्रों के मुताबिक, इस गड़बड़ी में करीब 50 करोड़ रुपये की ड्यूटी चोरी का मामला सामने आया है. जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई हो सकती है.
अलग-अलग शहरों के व्यापारी जुड़े
बताया जा रहा है कि यह माल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद के व्यापारियों के लिए मंगाया गया था. वहीं, कुछ ड्राई फ्रूट व्यापारियों ने मांग की है कि अगर कोई असली अफगान खेप है तो उसे अलग कर जारी किया जाए. अफगानिस्तान के दूतावास ने भी सही माल को रिलीज करने की बात कही है, ताकि असली व्यापार प्रभावित न हो.
क्यों होता है ऐसा खेल?
विदेशी अखरोट, खासकर अमेरिका और चीन के, गुणवत्ता में बेहतर माने जाते हैं. इनमें गिरी की मात्रा ज्यादा होती है और बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं. इसी वजह से कुछ व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए सस्ते रास्ते अपनाते हैं. पहले खाड़ी देशों के जरिए माल मंगाया जाता है, फिर उसे किसी तीसरे देश का बताकर शून्य ड्यूटी का फायदा लेने की कोशिश की जाती है.
माल की नीलामी
अगर कोई कंटेनर का दावा नहीं करता, तो नियमों के तहत माल की नीलामी की जा सकती है. हालांकि तब तक माल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है. कस्टम की इस कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि सरकार गलत तरीके से आयात और ड्यूटी चोरी को बर्दाश्त नहीं करेगी. यह कदम न केवल राजस्व की रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि घरेलू किसानों और ईमानदार व्यापारियों के हित में भी है.
घरेलू उत्पादकों को मिलेगा सहारा
इस कार्रवाई का सीधा फायदा देश के अखरोट उत्पादकों को मिल सकता है. अगर सस्ते विदेशी अखरोट गलत तरीके से बाजार में आएंगे, तो घरेलू किसानों को नुकसान होगा. सरकार की सख्ती से यह संकेत गया है कि घरेलू कृषि और वैध व्यापार को प्राथमिकता दी जाएगी. आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और निगरानी बढ़ने की संभावना है.