MSP procurement Rabi 2026: रबी सीजन 2026 से पहले केंद्र सरकार ने किसानों के लिए एक अहम निर्णय लिया है. सरकार ने चना, सरसों और मसूर की फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने को मंजूरी दे दी है. यह खरीद मूल्य समर्थन योजना के तहत की जाएगी. इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी, जिन्हें अक्सर बाजार में फसल के सही दाम नहीं मिल पाते.
सरकार का कहना है कि जब बाजार में दाम MSP से नीचे चले जाते हैं, तब किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकारी एजेंसियां आगे आकर खरीद करती हैं. इससे किसानों को अपनी उपज का न्यूनतम तय मूल्य मिल जाता है और उन्हें नुकसान से बचाया जा सकता है.
किन राज्यों में कितनी होगी खरीद
रबी 2026 के तहत चना की खरीद के लिए अलग-अलग राज्यों को लक्ष्य दिया गया है. महाराष्ट्र में 7.61 लाख टन चना खरीदने की मंजूरी मिली है. मध्य प्रदेश में 5.8 लाख टन, राजस्थान में 5.53 लाख टन और गुजरात में 4.13 लाख टन चना खरीदा जाएगा.
सरसों की बात करें तो राजस्थान को सबसे अधिक 13.78 लाख टन खरीद की अनुमति दी गई है. मध्य प्रदेश में 6.01 लाख टन और गुजरात में 1.33 लाख टन सरसों की खरीद की जाएगी. मसूर को भी इस योजना में शामिल किया गया है ताकि दाल उत्पादक किसानों को भी सुरक्षा मिल सके.
मूल्य समर्थन योजना क्या है
मूल्य समर्थन योजना तब लागू की जाती है, जब फसल की कटाई के समय बाजार भाव MSP से नीचे आ जाता है. ऐसे समय में सरकार तय मात्रा में फसल खरीदकर बाजार में संतुलन बनाने की कोशिश करती है. इससे कीमतों में स्थिरता आती है और किसानों को घाटे से बचाया जा सकता है.
यह योजना पीएम-आशा के तहत आती है, जिसमें मूल्य समर्थन योजना के साथ-साथ अन्य योजनाएं भी शामिल हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और बाजार में दाम गिरने की स्थिति में सुरक्षा देना है.
आत्मनिर्भरता मिशन पर भी जोर
सरकार ने दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए एक मिशन भी शुरू किया है. इसके तहत अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की खरीद पंजीकृत किसानों से की जाएगी. यह व्यवस्था 2030-31 तक जारी रखने की योजना है. इसका मकसद देश में दाल उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है.
दालों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार चाहती है कि किसान अधिक उत्पादन करें और उन्हें बाजार में स्थिर दाम मिलें. इससे देश खाद्य सुरक्षा के मामले में और मजबूत होगा.
राज्यों को समय पर खर्च करने की सलाह
बैठक के दौरान राज्यों को यह भी कहा गया कि केंद्र से मिलने वाले कृषि योजनाओं के फंड का सही और समय पर उपयोग करें. वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले सभी योजनाओं को गति देने और किसानों तक लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है.
सरकार का मानना है कि अगर योजनाओं का पैसा समय पर खर्च नहीं होगा, तो उसका पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा. इसलिए राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करें.
किसानों के लिए क्या मायने
इस फैसले का सीधा फायदा चना, सरसों और मसूर उगाने वाले किसानों को होगा. उन्हें यह भरोसा मिलेगा कि अगर बाजार में दाम गिरते हैं, तो सरकार MSP पर उनकी फसल खरीदेगी. इससे खेती में जोखिम कम होगा और किसानों का आत्मविश्वास बढ़ेगा.
रबी सीजन में इन फसलों की अहम भूमिका होती है. खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में किसान इन फसलों पर निर्भर हैं. ऐसे में सरकारी खरीद की मंजूरी उनके लिए राहत भरी खबर है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर खरीद प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू हुई, तो किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है. साथ ही, दाल और तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी से देश की खाद्य व्यवस्था मजबूत होगी.