नींबू में फूल आते ही किसान हो जाएं सतर्क, न दें ज्यादा पानी और खाद.. घट सकती है पैदावार

नींबू के पौधों में फूल आने की अवस्था सबसे नाजुक होती है. इस समय ज्यादा पानी, जलभराव या रासायनिक खाद से फूल झड़ सकते हैं. हल्की सिंचाई, मिट्टी की गुड़ाई और समय पर कीट नियंत्रण करने से फूल सुरक्षित रहते हैं. इससे फल अच्छी तरह बनते हैं और पैदावार बढ़ने की उम्मीद मजबूत होती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 31 Mar, 2026 | 08:00 PM

Lemon Farming: नींबू की खेती में फूल आने का समय सबसे नाजुक माना जाता है. इसी दौर में किसान की थोड़ी सी समझदारी आगे चलकर भरपूर पैदावार में बदल सकती है, जबकि छोटी सी गलती फूल झड़ने और उत्पादन घटने की वजह बन जाती है. इस समय पौधों को ज्यादा पानी, भारी खाद या लापरवाही से सबसे ज्यादा नुकसान होता है. NHRDF के कृषि विशेषज्ञ डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, फूल आने की अवस्था में हल्की सिंचाई, मिट्टी की गुड़ाई और समय पर कीट नियंत्रण से फूल सुरक्षित रहते हैं और फल बनने की संभावना बढ़ जाती है. नींबू के पौधों में जलभराव और असंतुलित सिंचाई से फूल गिरने का खतरा बढ़ता है.

फूल आने पर पानी कम, नमी ज्यादा जरूरी

डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, नींबू में जब फूल  निकलने लगते हैं, तब सबसे बड़ी जरूरत होती है मिट्टी में सिर्फ हल्की नमी बनाए रखने की. इस समय ज्यादा पानी देने से जड़ों पर दबाव बढ़ता है और पौधा तनाव में आकर फूल गिरा सकता है. विशेषज्ञ की सलाह है कि सप्ताह में एक बार हल्की सिंचाई करें. अगर मौसम में पहले से नमी हो तो सिंचाई का अंतर थोड़ा बढ़ाया जा सकता है. ध्यान रहे कि खेत या बाग में कहीं भी पानी जमा न हो. नींबू के पौधे जलभराव बिल्कुल पसंद नहीं करते और इससे जड़ सड़न का खतरा भी बढ़ जाता है. नियमित लेकिन नियंत्रित सिंचाई से फूल मजबूत रहते हैं और फल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है.

हल्की गुड़ाई से जड़ों को मिलती है ताकत

फूलों की अवस्था में बाग की हल्की गुड़ाई बहुत फायदेमंद मानी जाती है. इससे मिट्टी की ऊपरी सतह नरम रहती है और जड़ों तक हवा आसानी से पहुंचती है. जब जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, तो पौधा तेजी से पोषण  लेता है और फूल लंबे समय तक टिके रहते हैं. गुड़ाई करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. सिर्फ ऊपर की मिट्टी को हल्का ढीला करें. इससे खरपतवार भी कम होंगे और मिट्टी की नमी भी लंबे समय तक बनी रहेगी. यही छोटी तकनीक आगे चलकर बेहतर फल सेटिंग में मदद करती है.

इस समय रासायनिक खाद से बचें

फूल निकलने के समय कई किसान ज्यादा उत्पादन की उम्मीद में रासायनिक खाद डाल देते  हैं, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. इस अवस्था में तेज नाइट्रोजन या भारी खाद देने से पौधा अचानक नई पत्तियों की तरफ बढ़ता है और फूल झड़ने लगते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय पौधे को तनावमुक्त रखना सबसे जरूरी है. अगर पहले से गोबर की सड़ी खाद या जैविक खाद दी गई है तो उसी पर भरोसा करें. फूल और शुरुआती फल बनने के बाद ही जरूरत के अनुसार पोषण प्रबंधन करें. सही समय पर खाद देने से ही उत्पादन में असली फायदा मिलता है.

कीटों से बचाव करेंगे तो फूल रहेंगे सुरक्षित

फूल आने के समय रस चूसने वाले कीट और छोटे कीड़े पौधों को तेजी  से नुकसान पहुंचाते हैं. इससे फूल सूखने, काले पड़ने या गिरने लगते हैं. ऐसे में समय रहते हल्का और सुरक्षित दवा छिड़काव जरूरी है. विशेषज्ञ के अनुसार, कीटों की शुरुआती गतिविधि दिखते ही अनुशंसित दवा को पर्याप्त पानी में घोलकर पूरे बाग में समान रूप से छिड़काव करें. सुबह या शाम के समय स्प्रे करना ज्यादा असरदार रहता है. ध्यान रखें कि दवा की मात्रा संतुलित हो, क्योंकि ज्यादा मात्रा भी फूलों को नुकसान पहुंचा सकती है.

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Published: 31 Mar, 2026 | 08:00 PM
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