सिंधु जल संधि विवाद का पाकिस्तान पर दिखने लगा असर! गेहूं की खेती प्रभावित, उत्पादन में भारी गिरावट

पाकिस्तान इस साल 20- 22 लाख टन गेहूं की कमी का सामना कर सकता है. सिंधु जल संधि विवाद, अफगानिस्तान तनाव और सूखा किसानों के लिए चुनौती हैं. गेहूं उत्पादन घटने और पानी की कमी से आटे की कीमतें बढ़ीं. पंजाब की सूखा स्थिति और बढ़ती लागत ने किसानों पर दबाव डाला है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Feb, 2026 | 04:46 PM

Pakistan News: आने वाले महीनों में पाकिस्तान को गेहूं की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में वहां पर भीषण महंगाई आ सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस साल गेहूं की 20 लाख से 22 लाख टन की कमी का सामना कर सकता है. यह तब हो रहा है जब अफगानिस्तान के साथ तनाव और सिंधु जल संधि पर विवाद की वजह से पानी की उपलब्धता और खेती प्रभावित हो रही है. ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि गेहूं का आटा पाकिस्तान की बड़ी आबादी के लिए मुख्य भोजन है. इस स्तर की गिरावट घरेलू आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता पैदा करती है.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार झड़पें जारी हैं और बलोच लड़ाके अफगानिस्तान का समर्थन कर रहे हैं. बलोच क्षेत्र में खैबर से खैबर पख्तूनख्वा तक प्रमुख गेहूं उत्पादन वाले इलाके आते हैं. इन क्षेत्रों में अशांति के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों पर पहले से मौजूद दबाव और बढ़ गया है. इसलिए पाकिस्तान को गेहूं उत्पादन  के केंद्र वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और उत्पादन दोनों चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

जलाशयों में पानी की भारी कमी

रिपोर्ट में सिंधु जल संधि (IWT) से जुड़े तनाव को भी पानी प्रबंधन पर असर डालने वाला कारण बताया गया है. दरअसल, 2025 में भारत ने कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद संधि के कुछ हिस्सों को रोक दिया. इससे नदी के जल स्तर का डेटा साझा नहीं हो सका और पाकिस्तान को तर्बेला और मंगला जैसे जलाशयों का प्रबंधन मुश्किल हो गया.

पानी का प्रवाह लगभग 20 फीसदी कम हो गया

वहीं, सिंधु नदी प्रणाली में पानी का प्रवाह लगभग 20 फीसदी कम हो गया और जलाशयों की भंडारण क्षमता  केवल 30 दिन की होने से सूखा जैसी परिस्थितियों का खतरा बढ़ गया. पंजाब की सिंचाई प्रणाली खासकर खरीफ सीजन में दबाव में रही. पाकिस्तान मौसम विभाग के अनुसार, 2025 की शुरुआती बारिश औसत से 39 फीसदी कम हुई, जिसमें दक्षिणी और बारिश पर निर्भर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए.

91 लाख हेक्टेयर में हुई गेहूं की बुवाई

इसके चलते गेहूं की बुवाई का क्षेत्र 2025-26 में 103.7 लाख हेक्टेयर से घटकर 91 लाख हेक्टेयर रह गया. पानी की कमी ने उपज और किसानों की आय दोनों को प्रभावित किया. वहीं, सरकार की 20250- 26 सीजन के लिए समर्थन मूल्य घोषित करने में देरी ने भी किसानों के बुवाई के फैसलों को प्रभावित किया और कुल आपूर्ति कम हो गई.

1,500 पाकिस्तानी रुपये में बिक रहा 10 किलो आटा

अभी पाकिस्तान में आटे की खुदरा कीमतें क्षेत्र और गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग हैं. फरवरी 2026 के अंत तक 10 किलो का आटे का पैकेट आमतौर पर 890 से 1,500 पाकिस्तानी रुपये में बिक रहा था. 20 किलो का पैकेट लगभग 1,780 से 1,810 रुपये में मिलता है. प्रीमियम चक्की आटा 160- 200 रुपये प्रति किलो के बीच है. इस्लामाबाद में 10 किलो का पैकेट भी बहुत महंगा है. जबकि कराची और लाहौर में इसी पैकेट की कीमत लगभग 905 रुपये है.

गेहूं देश की जीडीपी में लगभग 2- 3 फीसदी का योगदान देता है

एक्सपर्ट का कहना है कि गेहूं उत्पादन घटने और पानी की कमी के कारण पाकिस्तान एक साथ क्षेत्रीय संघर्ष और कृषि दबाव दोनों का सामना कर रहा है. गेहूं पाकिस्तान के कृषि और आर्थिक क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट्स के अनुसार, गेहूं देश की जीडीपी में लगभग 2- 3 फीसदी का योगदान देता है. कई किसानों के लिए गेहूं की खेती सीधे उनके जीवनयापन और आजीविका से जुड़ी है. पंजाब, जिसे अक्सर पाकिस्तान का ‘गेहूं का कटोरा’  कहा जाता है, राष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति का केंद्र है. इस साल पंजाब में सूखे की स्थिति ने खाद्य संकट की आशंका बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती खेती की लागत, घटती उपज और सीमित सरकारी मदद ने गेहूं किसानों पर भारी दबाव डाल दिया है.

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Published: 28 Feb, 2026 | 04:44 PM

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