भारत का बासमती चावल अब अमेरिका में.. 5 हजार टन प्रीमियम चावल की बड़ी डील, किसानों और अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा

India-US Trade Deal: भारत एक बार फिर ग्लोबल एग्रीकल्चर ट्रेड में अपनी ताकत दिखा रहा है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने बताया है कि उसकी एक सदस्य कंपनी ने यूनाइटेड स्टेट्स के लिए 5,000 टन प्रीमियम भारतीय बासमती चावल के निर्यात का कमर्शियल एग्रीमेंट सफलतापूर्वक किया है. यह सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच कृषि सहयोग को और मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 19 Feb, 2026 | 10:55 AM

Basmati Rice Export Deal: भारत एक बार फिर वैश्विक कृषि बाजार में अपनी ताकत दिखा रहा है. इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने बताया कि उसकी एक सदस्य कंपनी ने यूनाइटेड स्टेट्स के लिए 5,000 टन प्रीमियम भारतीय बासमती चावल निर्यात करने का कमर्शियल एग्रीमेंट सफलतापूर्वक पूरा किया है. यह सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच कृषि सहयोग को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

अमेरिका के लिए यह डील क्यों अहम है?

अमेरिका का बाजार बहुत बड़ा और सख्त है. यहां खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियम बेहद कड़े हैं. ऐसे में 5,000 टन का ऑर्डर मिलना यह दिखाता है कि भारतीय बासमती की शुद्धता, खुशबू और लंबे दाने विश्व स्तर पर भरोसेमंद हैं.

IREF के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब भारतीय निर्यातकों पर भरोसा करते हैं. यह डील साबित करती है कि प्रीमियम बासमती ने अपनी पहचान बना ली है और भारतीय निर्यातकों की गुणवत्ता नियंत्रण क्षमता को मान्यता मिल रही है.

अमेरिकी बाजार में बढ़ती मांग

संयुक्त राज्य अमेरिका में एरोमैटिक और स्पेशलिटी राइस की मांग लगातार बढ़ रही है. भारतीय और स्थानीय समुदाय इसे हेल्दी और प्रीमियम विकल्प मानते हैं. अमेरिकी बाजार की खास बातें हैं:

  • सख्त फूड सेफ्टी नियम
  • ट्रेसेबिलिटी की अनिवार्यता
  • हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग

इसलिए 5,000 टन का ऑर्डर भारतीय कंपनियों की तैयारी और गुणवत्ता को दर्शाता है.

IREF का फोकस

IREF का कहना है कि अब निर्यातक सिर्फ मात्रा पर ध्यान नहीं देते, बल्कि गुणवत्ता, ट्रेसेबिलिटी और जिम्मेदार सोर्सिंग पर जोर देते हैं. प्रमुख बिंदु हैं:

  • सख्त क्वालिटी कंट्रोल और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन
  • सस्टेनेबल खेती और जिम्मेदार सोर्सिंग
  • हाई-वैल्यू ग्लोबल मार्केट में भारत की मजबूत मौजूदगी

किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर

इस डील से कई फायदे हैं:

  1. किसानों को बेहतर कीमत: प्रीमियम ऑर्डर से मांग और मूल्य बढ़ता है
  2. विदेशी मुद्रा में वृद्धि: डॉलर में भुगतान देश के लिए फायदेमंद
  3. एग्री-एक्सपोर्ट इकोसिस्टम मजबूत: लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग सेक्टर को बढ़ावा

IREF ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक माहौल और आसान प्रक्रियाओं से और बड़े अवसर बन सकते हैं. यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो अमेरिका आने वाले समय में भारतीय बासमती का और बड़ा खरीदार बन सकता है.

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