TNAU sugarcane machine: देश में गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) ने गन्ने की खेती में उपयोग होने वाली “सिंगल बड सेट कटर” मशीन के लिए 20 साल का पेटेंट हासिल किया है. यह पेटेंट भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा दिया गया है. यह मशीन ‘सस्टेनेबल शुगरकेन इनिशिएटिव’ (SSI) के तहत विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य गन्ने की खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और आसान बनाना है.
गन्ना भारत की प्रमुख नकदी फसल है और ब्राजील के बाद भारत में सबसे अधिक क्षेत्र में इसकी खेती होती है. देश में लगभग 47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है और औसत उत्पादन करीब 72 टन प्रति हेक्टेयर है. तमिलनाडु इस मामले में सबसे आगे है, जहां उत्पादकता 100 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक है. ऐसे में नई तकनीक किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.
क्या है सिंगल बड सेट कटर मशीन?
पारंपरिक तरीके से गन्ने की बुवाई में मजदूर हाथ से गन्ने के टुकड़े काटते हैं या साधारण बड चिपर का इस्तेमाल करते हैं. यह प्रक्रिया समय लेने वाली और मेहनत भरी होती है. कई बार कटाई एक समान नहीं होती, जिससे अंकुरण पर असर पड़ता है.
नई सिंगल बड सेट कटर मशीन 4 हॉर्स पावर के डीजल इंजन से चलती है. यह गन्ने की लंबी डंठलों को समान आकार के एक-एक कली (बड) में तेजी से काटती है. मशीन मजबूत स्टील फ्रेम पर तैयार की गई है और इसमें दांतेदार कटिंग डिस्क, सुरक्षा कवर, गन्ना पकड़ने की सुविधा, तैयार बड निकालने की नाली, उत्पादन गिनने के लिए काउंटर, कंपन कम करने की व्यवस्था और आसानी से इधर-उधर ले जाने के लिए पहिए लगाए गए हैं. यह मशीन 30, 35 और 40 मिलीमीटर के अलग-अलग आकार के सेट तैयार कर सकती है, जिसे किसान अपनी जरूरत के अनुसार सेट कर सकते हैं.
कम खर्च, ज्यादा उत्पादन
इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कार्यक्षमता और कम लागत है. परीक्षण के दौरान यह मशीन प्रति घंटे लगभग 1700 बड तैयार करने में सफल रही. जहां पारंपरिक तरीके से प्रति हेक्टेयर बड कटाई की लागत करीब 6,250 रुपये आती थी, वहीं इस मशीन से यह खर्च घटकर लगभग 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर रह गया. यानी लागत में भारी कमी और समय की भी बचत.
डेवलपर्स के अनुसार, यह मशीन समय और लागत दोनों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बचत करती है. इससे मजदूरों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को काम जल्दी निपटाने में मदद मिलेगी.
अंकुरण दर भी बेहतर
नई तकनीक का फायदा सिर्फ लागत तक सीमित नहीं है. परीक्षण में पाया गया कि नर्सरी में 95 प्रतिशत तक अंकुरण दर मिली, जबकि खेत की स्थिति में भी 90 प्रतिशत तक सफल अंकुरण दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि एक-एक पौधा मजबूत और समान रूप से विकसित होगा, जिससे गन्ने की पैदावार बेहतर होगी.
SSI पद्धति के तहत एकल कली वाले पौधों से अधिक और समान गन्ना उत्पादन संभव होता है. इससे खेत में पौधों की दूरी संतुलित रहती है और पौधे स्वस्थ रूप से बढ़ते हैं.
किसानों के लिए किफायती विकल्प
इस मशीन की कीमत लगभग 34,000 रुपये रखी गई है, जो इसे छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी किफायती बनाती है. एक बार निवेश करने के बाद किसान लंबे समय तक इसका लाभ उठा सकते हैं. श्रम लागत में कमी, बेहतर अंकुरण और अधिक उत्पादन से किसान की आय बढ़ने की संभावना है.
गन्ना खेती में बढ़ती मजदूरी और समय की कमी के बीच यह मशीन एक बड़ा समाधान बनकर उभरी है. आने वाले वर्षों में यदि किसान इस तकनीक को अपनाते हैं, तो गन्ना उत्पादन में नई क्रांति देखी जा सकती है.