sugar production 2025-26: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, लेकिन इस बार मौसम ने गन्ना किसानों और चीनी मिलों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में हुई अत्यधिक बारिश के कारण फसल की पैदावार पर असर पड़ा है. शुरुआती अनुमान के मुकाबले अब देश में चीनी उत्पादन कम रहने की संभावना जताई जा रही है.
व्यापार जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 2025-26 के विपणन वर्ष (जो सितंबर में समाप्त होगा) में भारत का कुल चीनी उत्पादन लगभग 28.5 से 29 मिलियन टन के बीच रह सकता है. यह पहले लगाए गए अनुमान से कम है. वहीं, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने इस साल उत्पादन 30.95 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया था.
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा असर
महाराष्ट्र, जो देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, वहां उत्पादन में सबसे अधिक कमी देखने को मिल सकती है. पहले यहां 10.8 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान था, लेकिन अब यह घटकर करीब 9.6 मिलियन टन रह सकता है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, राज्य के कई किसानों ने बताया कि जरूरत से ज्यादा बारिश के कारण गन्ने की जड़ों का विकास प्रभावित हुआ और फसल समय से पहले पक गई. कोल्हापुर के किसान विलास पाटिल के मुताबिक, उन्हें प्रति एकड़ कम से कम 60 टन गन्ने की उम्मीद थी, लेकिन उत्पादन केवल 48 टन प्रति एकड़ ही मिला. सितंबर महीने में महाराष्ट्र के गन्ना क्षेत्रों में सामान्य से 115 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे फसल की वृद्धि चक्र बाधित हो गया. वहीं राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस सीजन में अब तक लगभग 9 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, लेकिन गन्ने की कमी के कारण 207 मिलों में से लगभग आधी मिलें बंद हो चुकी हैं.
अन्य राज्यों में भी गिरावट
केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे अन्य प्रमुख राज्यों में भी गन्ने की पैदावार कम हुई है. लगातार बारिश ने खेतों में जलभराव की स्थिति पैदा की, जिससे जड़ें कमजोर हुईं और गन्ने की गुणवत्ता पर असर पड़ा. जिस वजह से इस बार उत्पादन में आई कमी का असर घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात पर भी पड़ेगा.
निर्यात लक्ष्य पूरा करना मुश्किल
भारत सरकार ने इस वर्ष पहले 1.5 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी और हाल ही में अतिरिक्त 5 लाख टन की मंजूरी देकर कुल निर्यात कोटा 2 मिलियन टन कर दिया. लेकिन व्यापारियों का मानना है कि मिलें शायद इस लक्ष्य का आधा भी पूरा नहीं कर पाएंगी.
घरेलू बाजार में बेहतर दाम मिलने के कारण मिलों को निर्यात में ज्यादा रुचि नहीं है. अनुमान है कि कुल निर्यात 7 लाख टन से अधिक नहीं हो पाएगा. इससे वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों को सहारा मिल सकता है, जो फिलहाल पांच साल के निचले स्तर के आसपास हैं.
गर्मी में बढ़ेगी मांग, बढ़ सकते हैं दाम
आने वाले महीनों में गर्मी बढ़ने के साथ चीनी की मांग भी बढ़ने की संभावना है. उत्पादन में कमी और बढ़ती घरेलू मांग मिलकर बाजार में कीमतों को ऊपर ले जा सकती है.