देश में चालू चीनी सीजन के शुरुआती महीनों ने मीठी खुशखबरी दी है. अक्टूबर से जनवरी के बीच भारत का चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर रहा है. इस दौरान उत्पादन में अच्छी बढ़त दर्ज की गई है, जिससे न केवल चीनी मिलों को राहत मिली है, बल्कि गन्ना किसानों के लिए भी उम्मीदें मजबूत हुई हैं. बेहतर मौसम, गन्ने की अच्छी पैदावार और मिलों की संख्या बढ़ने से यह उछाल देखने को मिला है.
चार महीनों में रिकॉर्ड के करीब पहुंचा उत्पादन
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, चीनी सीजन आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होकर अगले साल सितंबर तक चलता है. चालू 2025-26 सीजन में 31 जनवरी तक देश का चीनी उत्पादन करीब 1.95 करोड़ टन तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले करीब 18 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले सीजन की इसी अवधि में देश ने लगभग 1.65 करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया था. इस बार की बढ़त ने साफ कर दिया है कि इस सीजन में चीनी उद्योग की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आ रही है.
ज्यादा मिलें, ज्यादा पेराई
इस बार चीनी उत्पादन बढ़ने की एक बड़ी वजह ज्यादा संख्या में मिलों का संचालन भी है. जनवरी के अंत तक देशभर में 515 चीनी मिलें सक्रिय रहीं, जबकि पिछले साल इसी समय 501 मिलें ही चल रही थीं. मिलों की संख्या बढ़ने से गन्ने की पेराई तेज हुई और उत्पादन में इजाफा हुआ. इससे किसानों का गन्ना समय पर खरीदा गया और भुगतान की प्रक्रिया भी बेहतर रहने की उम्मीद जगी है.
महाराष्ट्र बना उत्पादन का इंजन
महाराष्ट्र एक बार फिर देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य बनकर उभरा है. इस सीजन में राज्य का चीनी उत्पादन करीब 42 प्रतिशत बढ़कर लगभग 78.7 लाख टन तक पहुंच गया है. पिछले साल की तुलना में यह बढ़ोतरी काफी अहम मानी जा रही है. महाराष्ट्र में इस बार 206 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 190 मिलें ही काम कर रही थीं. बेहतर पेराई और मिलों की संख्या बढ़ने से राज्य ने उत्पादन में बड़ी छलांग लगाई है.
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक का भी मजबूत प्रदर्शन
देश का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश भी इस सीजन में पीछे नहीं रहा. यहां जनवरी के अंत तक करीब 55.1 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है. राज्य में गन्ने की निरंतर आपूर्ति और मिलों की नियमित पेराई ने उत्पादन को स्थिर बनाए रखा है.
वहीं कर्नाटक में भी स्थिति पहले से बेहतर नजर आ रही है. यहां चीनी उत्पादन में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. राज्य में पेराई की रफ्तार में सुधार और गन्ने की उपलब्धता ने इस बढ़त में अहम भूमिका निभाई है.
पूरे सीजन को लेकर क्या है अनुमान
उद्योग संगठनों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो पूरे 2025-26 सीजन में देश का कुल चीनी उत्पादन करीब 3.1 करोड़ टन के आसपास पहुंच सकता है. यह पिछले सीजन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा. बढ़ता उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है.
किसानों और बाजार पर असर
चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी का सीधा फायदा गन्ना किसानों को मिलने की उम्मीद है. ज्यादा पेराई होने से किसानों का गन्ना समय पर खरीदा जा रहा है, जिससे भुगतान में देरी की समस्या कम हो सकती है. दूसरी ओर, बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर भी संतुलन बना रह सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.