देश में चीनी उत्पादन 22 प्रतिशत बढ़ा, महाराष्ट्र सबसे आगे, जानिए यूपी और कर्नाटक का हाल

इस जबरदस्त बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र का रहा है. राज्य में चीनी उत्पादन में 50 प्रतिशत से ज्यादा की छलांग देखने को मिली है. इस सीजन में महाराष्ट्र ने अब तक 64.60 लाख टन चीनी का उत्पादन कर लिया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 43.05 लाख टन था.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Jan, 2026 | 09:15 AM

Sugar production: इस बार देश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए सीजन काफी उम्मीदों भरा साबित हो रहा है. चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं. खेतों में अच्छी फसल, मिलों में तेज पेराई और बेहतर रिकवरी दर ने मिलकर चीनी उत्पादन को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में चीनी की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है, जिसका असर घरेलू बाजार से लेकर निर्यात नीति तक साफ नजर आने लगा है.

22 प्रतिशत बढ़ा चीनी उत्पादन

सहकारी चीनी मिलों का राष्ट्रीय महासंघ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 15 जनवरी तक देश में चीनी उत्पादन 158.85 लाख टन तक पहुंच गया है. यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 22 प्रतिशत ज्यादा है. बीते साल इसी समय देश में 130.60 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था. यह बढ़त बताती है कि इस बार गन्ने की उपलब्धता और पेराई दोनों ही मोर्चों पर हालात बेहतर रहे हैं.

महाराष्ट्र बना चीनी उत्पादन का इंजन

इस जबरदस्त बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र का रहा है. राज्य में चीनी उत्पादन में 50 प्रतिशत से ज्यादा की छलांग देखने को मिली है. इस सीजन में महाराष्ट्र ने अब तक 64.60 लाख टन चीनी का उत्पादन कर लिया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 43.05 लाख टन था. अच्छी बारिश, समय पर पेराई और मिलों की बेहतर कार्यक्षमता ने महाराष्ट्र को इस दौड़ में सबसे आगे ला खड़ा किया है.

यूपी और कर्नाटक की अलग-अलग तस्वीर

देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है. यहां चीनी उत्पादन में 7 प्रतिशत से भी कम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और आंकड़ा 45.70 लाख टन तक पहुंचा है. वहीं कर्नाटक में स्थिति थोड़ी बेहतर रही, जहां उत्पादन करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 30.70 लाख टन हो गया. इन तीनों राज्यों ने मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन का बड़ा हिस्सा दिया है, जिससे साफ है कि चीनी उद्योग अभी भी इन्हीं पर टिका हुआ है.

हर राज्य के लिए एक जैसा नहीं रहा सीजन

हालांकि यह सीजन सभी राज्यों के लिए खुशखबरी लेकर नहीं आया. बिहार, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले साल की तुलना में चीनी उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. कहीं गन्ने की कमी तो कहीं मौसम और पेराई से जुड़ी दिक्कतें इसकी वजह बनी हैं.

ज्यादा पेराई और बेहतर रिकवरी का असर

इस साल चीनी मिलों की सक्रियता भी बढ़ी है. 15 जनवरी तक 519 चीनी मिलें चालू रहीं और करीब 1,763 लाख टन गन्ने की पेराई की गई. इसके साथ ही रिकवरी दर में भी सुधार देखने को मिला है. औसतन 100 किलो गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा बढ़ी है, जिससे कुल उत्पादन को सीधा फायदा हुआ.

निर्यात नीति में भी बदलाव

उत्पादन बढ़ने के बीच सरकार ने चीनी निर्यात को लेकर भी कदम उठाए हैं. निर्यात कोटे के पुनर्आवंटन का तीसरा आदेश जारी किया गया है, जिसमें कुछ मिलों ने अपने निर्यात कोटे को घरेलू कोटे से बदला है. सरकार पहले ही 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दे चुकी है, जिसे तय समय सीमा में पूरा किया जाना है.

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