उत्तर प्रदेश समेत ज्यादातर राज्यों ने इस पेराई सीजन में किसानों को गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी की सौगात दी है. इसकी वजह से किसानों में चीनी मिलों को गन्ना देने में उत्साह देखा जा रहा है. इसके चलते बीते साल की तुलना में इस बार चीनी उत्पादन ने नया रिकॉर्ड बनाया है. बीते पेराई आंकड़ों में कई बार चीनी उत्पादन में यूपी देश में नंबर वन रहता रहा है. लेकिन, ताजा आंकड़ों में महाराष्ट्र ने सर्वाधिक चीनी उत्पादन करके पहला स्थान हासिल कर लिया है. उद्योग का कहना है कि बंपर चीनी उत्पादन ने बाजार कीमतों को स्थायी बनाए रखने में मददगार साबित होगी.
पिछले साल की तुलना में 25 फीसदी चीनी उत्पादन बढ़ा
चीनी उद्योग के शीर्ष निकाय इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में चीनी उत्पादन के आंकड़े जारी कर दिए हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार अखिल भारतीय चीनी उत्पादन 118.97 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में उत्पादित 95.40 लाख टन की तुलना में लगभग 25 फीसदी अधिक है. वर्तमान में 504 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले सीजन में इसी समय 492 मिलें चालू थीं.
चीनी उत्पादन में कौन सा राज्य सबसे आगे
देशभर में चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा है. महाराष्ट्र ने हाईएस्ट पेराई दर बनाए रखते हुए असाधारण प्रदर्शन किया है और चीनी उत्पादन 48.61 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले सीजन की इसी अवधि की तुलना में लगभग 62 फीसदी अधिक है. राज्य में वर्तमान में 197 मिलें चालू हैं, जबकि इसी तारीख को 190 मिलें चालू थीं. महाराष्ट्र में अभी पेराई सीजन और गति पकड़ने का अनुमान है.
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यूपी और कर्नाटक ने भी चीनी उत्पादन बढ़ा
चीनी उत्पादन के मामले में देश में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है. राज्य में 35.86 लाख टन चीनी का उत्पादन दर्ज किया गया है, जो दिसंबर के अंत तक पिछले साल की तुलना में 3.06 लाख टन (+9%) की वृद्धि दर्ज की है. इसी तरह कर्नाटक ने भी पेराई गतिविधि में तेजी की सूचना दी है, चीनी उत्पादन 22.81 लाख टन हुआ है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 20.40 लाख टन उत्पादन की तुलना में लगभग 12 फीसदी अधिक रहा है.
6 साल से चीनी का सेलिंग प्राइस नहीं बढ़ा, केंद्र फैसला ले
ISMA ने चीनी के मिनिमम सेलिंग प्राइस (MSP) में बढ़ोतरी की अपनी मांग को फिर से दोहराया है, जो बढ़ती उत्पादन लागत के बावजूद छह साल से ज्यादा समय से बढ़ाई नहीं गई है. हाल ही में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में गन्ने की कीमत बढ़ने से पूरे भारत में औसत प्रोडक्शन कॉस्ट 41.72 रुपये प्रति किलो हो गई है. मिलों को सही रिटर्न और किसानों को समय पर पेमेंट पक्का करने के लिए MSP बढ़ाना जरूरी है.