Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में राज्य पक्षी सारस की बढ़ती संख्या पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. योगी सरकार की ओर से वन और वन्यजीव संरक्षण पर लगातार किए जा रहे प्रयास अब जमीन पर असर दिखाने लगे हैं. हाल ही में हुई शीतकालीन गणना में प्रदेश में सारसों की संख्या बढ़कर 20,628 पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष से अधिक है. यह आंकड़ा न सिर्फ वन विभाग के प्रयासों की सफलता दिखाता है, बल्कि आम लोगों की भागीदारी को भी दर्शाता है.
संरक्षण के प्रयासों से बढ़ा सारस का कुनबा
उत्तर प्रदेश में सारस संरक्षण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में विशेष अभियान चलाए गए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वन विभाग ने सारस के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और उनके संरक्षण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं. इसी का परिणाम है कि 2023 में 19,196, 2024 में 19,994 और अब 2025-26 की शीतकालीन गणना में 20,628 सारस दर्ज किए गए हैं. वन विभाग के अनुसार, राज्य में हर साल गर्मी के मौसम और ठंड़ के मौसम में सारस की गणना की जाती है, जिससे उनकी वास्तविक संख्या और संरक्षण की स्थिति का पता चलता है.

सारस की संख्या लगातार बढ़ रही है.
उत्तर प्रदेश के इटावा में सबसे ज्यादा सारस
इस बार की गणना में इटावा वन प्रभाग में सबसे अधिक 3304 सारस पाए गए. इसके अलावा मैनपुरी (2899) और औरैया (1283) में भी बड़ी संख्या में सारस दर्ज किए गए. इसी तरह शाहजहांपुर, गोरखपुर, कन्नौज, कानपुर देहात, हरदोई, सिद्धार्थनगर और संतकबीर नगर सहित कुल 10 वन प्रभागों में 500 से ज्यादा सारस मिले. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में जल स्रोत, खेत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है, वहां सारस की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
यूपी के इन इलाकों में कम संख्या दर्ज
प्रदेश के 29 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 100 से 500 के बीच दर्ज की गई. इनमें रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बरेली, बाराबंकी और बांदा जैसे जिले शामिल हैं. वहीं 29 वन प्रभाग ऐसे भी रहे, जहां 100 से कम सारस पाए गए. इनमें पीलीभीत सामाजिक वानिकी, अयोध्या, मेरठ, प्रयागराज, जौनपुर और रामपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में संरक्षण और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि सारस के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सके.

उत्तर प्रदेश में राज्य पक्षी सारस की संख्या.
जनभागीदारी से मजबूत हुआ संरक्षण अभियान
सारस की शीतकालीन गणना कार्यक्रम में इस बार करीब 10 हजार नागरिकों ने भाग लिया, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है. गणना से पहले वन विभाग की टीमों ने सारस के प्राकृतिक आवास का सर्वेक्षण कर महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की थी. इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से गणना पूरी की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि सारस सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण का संकेतक है. खेतों, तालाबों और जलाशयों के सुरक्षित रहने से ही सारस की संख्या बढ़ती है.