Sugarcane Farming: भारत में गन्ने को अक्सर ‘सफेद सोना’ कहा जाता है और इसकी वजह साफ है – यह फसल लंबे समय तक किसानों को लाभ देती है. लेकिन बिना सही जानकारी और प्रबंधन के किसान उतनी पैदावार नहीं ले पाते जितनी संभव है. अगर सही समय, उन्नत किस्म और उचित देखभाल के साथ गन्ने की खेती की जाए, तो यह फसल आपकी जेब को भी मीठा कर सकती है.
सही समय और मिट्टी का चुनाव
गन्ने की बुवाई मुख्यतः दो मौसमों में होती है – शरद कालीन (अक्टूबर-नवंबर) और बसंत कालीन (फरवरी-मार्च). शरद कालीन बुवाई में पैदावार अधिक मिलती है. मिट्टी की बात करें तो दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसमें जल निकासी अच्छी हो.
उन्नत किस्मों का चयन
गन्ने की अच्छी पैदावार और मुनाफा पाने के लिए उन्नत किस्में चुनना जरूरी है. आज के समय में Co 0238, Co 0118 और Co 15023 जैसी किस्में लोकप्रिय हैं. ध्यान रहे कि कुछ किस्मों में लाल सड़न रोग (Red Rot) की समस्या हो सकती है, इसलिए रोग-प्रतिरोधी किस्म का चुनाव करें.
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ट्रेंच विधि अपनाएं
पारंपरिक तरीके से गन्ना बोने के बजाय ट्रेंच विधि अपनाना फायदेमंद है. इसमें गन्ने के बीच 4-5 फीट की दूरी रखी जाती है, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है. इसका असर गन्ने की मोटाई और चीनी की मात्रा पर दिखाई देता है.
बीज उपचार (Seed Treatment)
गन्ने में लाल सड़न रोग जैसी बीमारियों से बचाव के लिए बीज उपचार जरूरी है. गन्ने के टुकड़ों को बोने से पहले 15-20 मिनट के लिए ‘कार्बेन्डाजिम’ या किसी अच्छे फंगीसाइड के घोल में डुबोएं.
खाद और उर्वरक का संतुलन
गन्ने को संतुलित पोषण की जरूरत होती है. बुवाई के समय गोबर की सड़ी खाद (FYM) डालें और मिट्टी जांच के बाद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक और सल्फर का संतुलित उपयोग करें.
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी चाहिए, खासकर गर्मी में, लेकिन पानी खड़ा नहीं होना चाहिए. नियमित निराई-गुड़ाई से खरपतवारों को हटाना भी जरूरी है, ताकि पौधों को पोषण मिल सके.
गन्ने की खेती का मुनाफा
एक एकड़ में गन्ने की बुवाई से कटाई तक खर्च करीब ₹45,000-₹55,000 आता है. औसतन पैदावार 400-500 क्विंटल होती है. यदि बाजार भाव ₹360 प्रति क्विंटल मानें, तो कुल कमाई ₹1.44 लाख-₹1.80 लाख हो सकती है. लागत घटाने के बाद शुद्ध मुनाफा लगभग ₹90,000-₹1.30 लाख प्रति एकड़ होता है.
सह-फसली खेती से अतिरिक्त लाभ
गन्ने की बुवाई के बीच खाली जगह में दालें या सब्जियां उगा कर किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं और खाद-पानी का खर्च भी कम कर सकते हैं.