गन्ना किसानों को भा रहा ट्रेंच विधि से बुवाई का तरीका, उपज बढ़ेगी और हिंसक पशुओं से भी किसान बचेंगे

Sugarcane Farming: उन्होंने बताया कि इस सफलता के बाद अब फरवरी में बड़े पैमाने पर किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. इस विधि से न केवल गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी बल्कि गुलदार जैसे जंगली जानवर से फसल और किसान दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है.

अनामिका अस्थाना
नोएडा | Published: 15 Oct, 2025 | 09:00 AM

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में गन्ना विभाग फरवरी से शुरू होने वाली गन्ना बुवाई को लेकर तैयारी में जुट गया है. प्रदेश के बिजनौर जिले में गन्ना विभाग किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. फरवरी से शुरू होने वाली गन्ना बुवाई के दौरान विभाग का लक्ष्य है कि लगभग 40 हजार हेक्टेयर इलाके में ट्रेंच विधि (Trench Method) से गन्ना बोया जाए. इस विधि से गन्ने की खेती करने से न केवल किसानों की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी बल्कि गुलदार और अन्य जंगली जानवरों से भी फसल सुरक्षित रहेगी.

पैदावार में होगी बढ़ोतरी

पारंपरिक तरीकों से गन्ने की खेती  (Sugarcane Farming)करने के मुकाबले ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई करने पर उत्पादन ज्यादा मिलेगा. बता दें कि, ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई करने पर फसल की उपज 100 क्विंटल प्रति बीघा तक आसानी से पहुंच सकती है, जो कि आम तौर पर गन्नी की बुवाई से होने वाली पैदावार से कई गुना ज्यादा है. इसके साथ ही ट्रेंच विधि की मदद से किसान अपने खेत में इंटरक्रॉपिंग भी कर सकते हैं, जिसके कारण उन्हें खेती से एक्स्ट्रा कमाई भी होगी. अधिकारियों का मानना है कि अगर किसान इस आधुनिक और सुरक्षित तरीके को बड़े पैमाने पर अपनाते हैं तो भविष्य में गन्ना उत्पादन  (Sugarcane Production)और किसानों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी.

गुलदार से मिलेगी सुरक्षा

मीडिया रिपोर्टेस के अनुसार, प्रदेश के बिजनौर जिले में ही अकेले गुलदार की संख्या करीब 400 से ज्यादा है. जो कि ग्रामीणों के लिए एक बड़ा खतरा है. ये गुलदार अक्सर गन्ने के खेतों में छिपकर किसानों या ग्रामीणों पर हमला कर देते हैं.जानकारी के अनुसार, साल 2023 से लेकर अबतक गुलदार के हमलों में करीब 35 लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे में किसानों का खेतों में काम करना बड़ी चुनौती है. बता दें कि, गन्ना विभाग द्वारा ट्रेंच विधि को बढ़ावा देने से इस समस्या का समाधान भी हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि, इस विधि से बोए गए गन्ने में पौधों की कतारें गहरी और व्यवस्थित होती हैं. ऐसे खेतों में गुलदार आसानी से छिप नहीं पाते और किसान दूर से ही उन्हें देख सकते हैं. इस तरह गुलदार या फिर अन्य जंगली जानवरों के हमले का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.

गन्ना विभाग किसानों को कर रहा प्रोत्साहित

बिजनौर के जिला गन्ना अधिकारी प्रभु नरायन सिंह ने बताया कि, इस साल बारिश के कारण गन्ना बुवाई कम हुई है, लेकिन ट्रेंच विधि की मदद से सितंबर से अक्टूबर के बीच लगभग 350 हेक्टेयर इलाके में गन्ना की बुवाई की जा चुकी है. उन्होंने बताया कि इस सफलता के बाद अब फरवरी में बड़े पैमाने पर किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

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Published: 15 Oct, 2025 | 09:00 AM

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