बरसात शुरू होते ही गमलों में बो दें ये पौधे, घर बैठे मिलेंगे ताजे फल और सब्जियां

मॉनसून का मौसम घर पर किचन गार्डेनिंग शुरू करने के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. सही पौधों और थोड़ी देखभाल के साथ सीमित जगह में भी ताजे फल और सब्जियां उगाई जा सकती हैं. इससे परिवार को रसायन मुक्त भोजन मिलता है और बाजार पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हो सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jun, 2026 | 05:16 PM

Monsoon Gardening: मॉनसून का मौसम किचन गार्डेनिंग शुरू करने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहती है, जिससे बीजों का अंकुरण और पौधों की बढ़वार तेजी से होती है. अगर आपके घर में छत, बालकनी या खुली जगह है, तो कुछ गमलों में फल और सब्जियों के पौधे लगाकर ताजा और रसायन मुक्त उपज प्राप्त की जा सकती है. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, सही किस्मों का चयन और नियमित देखभाल करने से कम जगह में भी अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

मॉनसून में किचन गार्डेनिंग क्यों है फायदेमंद?

डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, बरसात के मौसम में पौधों  को प्राकृतिक नमी मिलती रहती है. इससे बार-बार सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है और पौधों की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं. यही वजह है कि इस मौसम में लगाए गए पौधे अपेक्षाकृत जल्दी बढ़ते हैं. घर पर उगाई गई सब्जियां और फल ताजे होने के साथ-साथ रसायन मुक्त भी होते हैं. इससे परिवार को पौष्टिक भोजन मिलता है और बाजार से बार-बार सब्जियां खरीदने की जरूरत भी कम हो जाती है. किचन गार्डेनिंग पर्यावरण के लिए भी लाभदायक मानी जाती है.

गमलों में लगाएं बैंगन और मिर्च की उन्नत किस्में

विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून में बैंगन और मिर्च की कुछ उन्नत किस्में गमलों  में आसानी से उगाई जा सकती हैं. बैंगन की ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जो कम समय में फल देना शुरू कर देती हैं और ज्यादा देखभाल की जरूरत भी नहीं होती. इसी तरह मिर्च की कई किस्में छोटे गमलों में भी अच्छी पैदावार देती हैं. यदि पौधों को पर्याप्त धूप, जैविक खाद और समय-समय पर पानी मिलता रहे, तो लंबे समय तक उत्पादन लिया जा सकता है. इससे घर की रोजमर्रा की जरूरतें काफी हद तक पूरी हो सकती हैं.

लौकी, नींबू और अमरूद भी उगा सकते हैं घर पर

डॉ. मिश्रा बताते हैं कि केवल सब्जियां ही नहीं, बल्कि कई प्रकार के फलदार पौधे भी गमलों में सफलतापूर्वक उगाए जा सकते हैं. लौकी की कुछ किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं और बेलों के रूप में तेजी से फैलती हैं. नींबू के पौधे भी गमलों में अच्छी तरह विकसित होते हैं. वहीं अमरूद की कुछ विशेष किस्में कंटेनर गार्डेनिंग के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. उचित देखभाल करने पर ये पौधे नियमित  रूप से फल देना शुरू कर देते हैं और लंबे समय तक उत्पादन देते हैं.

स्ट्रॉबेरी और सेब की खेती भी है संभव

आजकल ऐसी किस्में उपलब्ध हैं जिन्हें गमलों में उगाने के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है. स्ट्रॉबेरी के पौधे  सीमित जगह में भी अच्छी बढ़वार करते हैं और स्वादिष्ट फल देते हैं. वहीं सेब की कुछ उन्नत किस्में गर्म क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि गमलों में पौधे लगाते समय अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी, जैविक खाद और जल निकासी की उचित व्यवस्था होना जरूरी है. यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो छत या बालकनी को एक छोटे किचन गार्डेन में बदला जा सकता है, जहां से पूरे परिवार को ताजे, पौष्टिक और रसायन मुक्त फल-सब्जियां मिल सकती हैं.

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